रायबरेली। डलमऊ नहर पंप की बदहाली का मुद्दा विधानसभा में ऊंचाहार विधायक डॉ. मनोज कुमार पांडेय ने उठाया था। बताया था कि लिफ्टिंग पंप ट्रांसफार्मर और अन्य मशीन खराब हैं, जिस कारण पंप से सिंचाई का पानी किसानों के खेतों तक नहीं जा रहा है। सिंचाई के अभाव में किसानों की फसल सूखती हैं और उन्हें अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। इसपर डलमऊ नहर पंप की क्षमता वृद्धि करने और जर्जर मशीनों को बदलवाने के लिए 3806.66 लाख रुपये की परियोजना को स्वीकृति दे दी गई है। प्रमुख सचिव सिंचाई ने विधायक को अवगत कराया कि कैनाल के पंपों की समयावधि पूरी हो गई है। इस कारण पंप से जलनिकासी 30 प्रतिशत कम हो गई है। साथ ही पंप नहर के पास स्थापित 33 केवीए का उपकेंद्र भी पुराना हो गया है जिससे ब्रेकडाउन और फाॅल्ट की समस्या बनी रहती है। समस्या के निराकरण के लिए चौधरी चरण सिंह डलमऊ पंप नहर के आधुनिकीकरण के लिए परियोजना गठित की गई है।
असल में विधायक डॉ मनोज कुमार पांडेय ने याचिका समिति की बैठक में भी मामले को उठाया था। बताया गया था कि डलमऊ नहर पंप में 16 लिफ्टिंग पंप लगे हैं। इनके जरिए गंगा से पानी लिफ्ट कर एक सप्ताह ऊंचाहार और एक सप्ताह सदर क्षेत्र में जाता था। तीन साल से हाल यह है कि पूरे साल में तीन से चार बार ही पंप चलते हैं। इस कारण ऊंचाहार के तीन हजार किसानों कोे सिंचाई के पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। ग्राम कंदरावां और कोटरा बहादुरगंज में स्थिति अधिक खराब है।
विधायक डॉ. मनोज कुमार पांडेय ने बताया कि डलमऊ नहर पंप का कायाकल्प होने से ऊंचाहार के किसानों को भरपूर पानी मिलेगा। लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान हो जाएगा।