जिला अस्पताल के दवा काउंटर पर महिलाओं की लगी लंबी कतार।
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रायबरेली। गर्मी की शुरुआत में ही संक्रामक रोगों ने पांव पसारना शुरू कर दिया है। बुखार के चपेट में आने के बाद मंगलवार को 12 मरीजों की हालत बिगड़ गई। गंभीर हालत में मरीजों को जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचकर भर्ती कराया गया। उधर, ओपीडी में भी 1730 से अधिक मरीज चिकित्सीय सलाह लेने के लिए पहुंचे। सबसे अधिक मेडिसिन विभाग में करीब 600 रोगी पहुंचे।
मौसम में बदलाव के साथ ही जुकाम, बुखार, डायरिया के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। मंगलवार को बुखार के चपेट में आने के बाद अफसार (10), अरशद (4), पप्पू (45), किश (11), रामरती (30), त्रिलोचन (60), आयशा (6) समेत 12 से अधिक रोगियों की हालत बिगड़ गई। मरीजों को जिला अस्पताल की इमरजेंसी लाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों को वार्डों में भर्ती करके इलाज शुरू किया गया है।
उधर, ओपीडी में सुबह से ही मरीजों की लाइन दिखी। परचा काउंटर के साथ ही ओपीडी कक्षों के बाहर मरीजों को इंतजार करना पड़ा। जिला अस्पताल के दवा के काउंटरों पर लंबी लाइन रही। ब्लड की जांच कराने के लिए पैथोलॉजी में घंटों इंतजार करना पड़ा। मौसम को देखते हुए मेडिसिन विभाग में सबसे अधिक मरीज चिकित्सीय सलाह लेने के लिए पहुंचे। ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में भी मरीज बढ़े हैं। जगतपुर सीएचसी अधीक्षक डॉ. एलपी सोनकर ने बताया कि रोजाना दो सौ से अधिक मरीज आ रहे हैं। इसमें 150 मरीज जुकाम, बुखार और उल्टी-दस्त से ग्रसित होते हैं। गंभीर मरीजों को भर्ती करके इलाज किया जा रहा है।
इमरजेंसी में दवा लिख रहा युवक सीएमएस को देखकर भागा
जिला अस्पताल की ओपीडी में बाहरी लोगों को भगाने के बाद मंगलवार को अपराह्न करीब तीन बजे सीएमएस डॉ. प्रदीप अग्रवाल इमरजेंसी पहुंच गए। सीएमएस को शिकायत मिली कि विकास नाम का युवक इमरजेंसी में आ रहे मरीजों को बाजार के महंंगे इंजेक्शन लिख रहा है। सीएमएस को देखते ही युवक भाग निकला। सीएमएस ने इमरजेंसी चिकित्सा अधिकारी और फार्मासिस्ट को सख्त निर्देश दिए कि दोबारा बाहरी व्यक्ति यहां बैठा मिला तो कार्रवाई होगी। इस दौरान अफरातफरी का माहौल रहा।