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साढ़े तीन लाख किसानों के सामने फसलों की बोवाई का संकट

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रायबरेली में शुक्रवार को मुशीगंज में बरसात न होने से सूखे पड़े खेत। - फोटो : RAIBARAILY
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रायबरेली। जिले में इस बार सूखे के आसार दिख रहे हैं। हालात ये हैं कि जून का माह बीतने वाला है। बावजूद इसके अब तक बारिश न के बराबर हुई है। ऐसे में 3.50 लाख किसानों के सामने फसलों की बुवाई का संकट आ खड़ा है। कृषि विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो धान की नर्सरी तो किसानों ने डाल दी है, लेकिन धान की रोपाई और अन्य फसलों की बुवाई का कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है।
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इस समय खरीफ की फसल की बोवाई का सीजन चल रहा है। इस सीजन में धान की रोपाई के अलावा उर्द, मक्का, ज्वार, बाजरा आदि की फसलों की बोवाई की जानी है। बारिश बिना धान की रोपाई और फसलों की बोवाई का कार्य पूरी तरह प्रभावित है। वर्ष 2018 के जून माह में 25.7 मिमी. बारिश हुई थी। इस साल के जून माह में महज 9.6 मिमी. बारिश हुई है, जो पिछले साल से काफी कम है।
यही वजह है कि खेती किसानी कार्य प्रभावित है। नहरों में भी पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। इससे किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई है। हर दिन आसमान में बदली छाती और काले बादल छाते हैं, लेकिन इंद्रदेव दगा जे जाते हैं। इससे किसान परेशान और हलाकान है।
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फसलों की बुवाई पर एक नजर
फसल का नाम लक्ष्य पूर्ति
धान नर्सरी 6208 5560
धान की रोपाई 93124 0
मक्का 31 0
ज्वार 5789 0
बाजरा 933 0
उर्द 16451 0
मूंग 966 0
अरहर 5465 0
मूंगफली 1347 0
तिल 2960 0
नोट- आंकड़े हेक्टेयर क्षेत्रफल में है।
जिला कृषि अधिकारी रविचंद्र प्रकाश ने बताया कि मानसून इस बार लेट जरूर है, लेकिन किसान चिंतित कतई न हो। मानसून लेट होने पर किसान कम पानी वाली फसलों मूंग, दलहन आदि की बोवाई करें। खेतों को कतई परती न रखें। हालांकि उम्मीद है कि जल्द मानसून आएगा और खूब बारिश होगी। किसानी का कार्य जोर पकड़ेगा।
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