चोरी की शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय लालगंज कोतवाली पुलिस ने बाप-बेटे को लॉकअप में बंद कर दिया। उनकी जमकर धुनाई की। छोड़ने के लिए 10 हजार रुपये मांगे।
पिता की हालत बिगड़ने पर पुलिस ने उसे परिवारीजनों को सौंप दिया। उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
लालगंज कस्बे के पान दरीबा मोहल्ला निवासी अब्दुल नसीर (45) का बड़ा बेटा मोबीन अख्तर बाईपास रोड पर गाड़ी की धुलाई का काम करता है। यहां से मोबाइल फोन और नगदी चोरी हो गई।
अल्लानगर के कैफी पर शक जताते हुए वे शुक्रवार शाम शिकायत दर्ज कराने पहुंचे। पुलिस कैफी को भी पकड़कर कोतवाली लाई। इसके बाद तीनों को लॉकअप में बंद कर दिया। देर रात रिश्वत लेने के लिए लॉकअप में ही पुलिस ने बाप-बेटे की पिटाई की। पिटाई से नसीर बेहोश हो गया।
...पर नहीं भेजा अस्पताल
मारपीट का शिकार हुआ अब्दुल नसीर
- फोटो : amar ujala
इसके बावजूद पुलिस वालों ने उसे अस्पताल न पहुंचाकर परिवारीजनों के हवाले कर दिया। सीएचसी में हालत नाजुक होने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। नसीर का कहना है कि पुलिस वालों ने उसकी और बेटे की पिटाई की साथ ही छोड़ने के लिए 10 हजार रुपये की रिश्वत भी मांगी।
कोतवाल की बात को भी किया अनसुना
दरोगा वीरेंद्र कुमार और सिपाही शंभूदयाल ने कोतवाल तक की बात को अनसुना कर दिया। कोतवाल धनंजय सिंह अपराध समीक्षा बैठक में भाग लेने के लिए जिला मुख्यालय गए थे। कोतवाल ने फोन कर दरोगा व सिपाही को बाप-बेटे को छोड़ने की बात कही, लेकिन उन्होंने कोतवाल की बात को भी अनसुना कर दिया।
दरोगा-सिपाही दोषी
इस पर एसपी हरिनारायण सिंह का कहना है कि मामले में प्रथमदृष्टया दरोगा व सिपाही को दोषी पाया गया है। दोनों को लाइन हाजिर कर दिया है। जांच सीओ लालगंज सौंपी है। रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।