केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को शहर के जेल रोड स्थित अनुकंपा नर्सिंग होम में छापा मारा। छापे के दौरान जांच में पाया गया कि यहां पर गर्भवती महिलाओं की जांच के नाम पर लापरवाही बरती जा रही है। अल्ट्र्र्रासाउंड किए जाने की रिपोर्ट केंद्र सरकार को नहीं भेजी जा रही थी।
साथ ही दस्तावेज भी आधे अधूरे मिले। इस पर टीम ने अल्ट्रासाउंड मशीन व दस्तावेजों को सीज कर दिया। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को जांच करके कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अचानक टीम की छापेमारी से हड़कंप मच गया। किसी को इसकी भनक तक नहीं लग पाई।
भारत सरकार के परामर्शदाता डॉ. वैभव, स्वास्थ्य मंत्रालय के एएसओ डॉ. श्रीभट्ट और परिवार कल्याण महानिदेशक लखनऊ के संयुक्त निदेशक व नोडल अफसर डॉ. वीरेंद्र कुमार शुक्रवार को यहां पर पहुंचे। टीम के सदस्य जिला प्रशासन के अधिकारियों से मिले। इसके बाद एसडीएम सदर शैलेंद्र मिश्रा, एसीएमओ डॉ. एसके चक की अगुवाई में टीम जेल रोड स्थित अनुकंपा नर्सिग होम में औचक छापेमारी की।
टीम के पहुंचते ही वहां पर काम कर रहे कर्मियों में हड़कंप मच गया। टीम के सदस्यों ने गर्भवती महिलाओं के किए गए अल्ट्रासाउंड के दस्तावेज चेक किए, जो अधूरे मिले। महिलाओं के कितने अल्ट्रासाउंड किए जा रहे थे, इसकी सूचना भी भारत सरकार को नहीं दी जा रही थी। इस पर अल्ट्रासाउंड मशीन व दस्तावेज को सीज कर दिया गया।
एसीएमओ डॉ. एसके चक ने बताया कि यह नर्सिग होम डॉ. दिलीप का है। नर्सिंग होम की अल्ट्रासाउंड मशीन विभाग से पंजीकृत है। गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। भ्रूण की जांच न की जा सके, इसके लिए केंद्र सरकार को कितने महिलाओं के अल्ट्रासाउंड किए गए, इसकी पूरी रिपोर्ट भेजी जानी चाहिए।
पर जांच के दौरान रिपोर्ट देने में लापरवाही पाई गई। साथ ही दस्तावेज भी आधे अधूरे मिले। इस पर अल्ट्रासाउंड मशीन व दस्तावेजों को सीज कर दिया गया है। विभागीय जांच की जा रही है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
..तो क्या की जा रही थी भ्रूण लिंग की जांच
अनुकंपा नर्सिंग होम में लापरवाही के चलते अल्ट्रासाउंड और दस्तावेजों को सीज किए जाने की बात जरूर विभागीय अफसर कर रहे हैं, लेकिन सवाल उठता है कि क्या यहां पर भ्रूण लिंग की जांच की जा रही थी। यही नहीं स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की लापरवाही भी खुलकर सामने आ गई है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को निर्देश देकर नर्सिंग होमों का निरीक्षण करने के निर्देश जारी किए जाते हैं, लेकिन इसमें मनमानी की जाती है।
सेटिंग-गेटिंग के चक्कर में विभागीय अधिकारी कार्रवाई नहीं करते हैं। ऐसे कई नर्सिंग होम हैं, जहां पर मनमाने तरीके से कार्य हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जानकर भी अंजान बने हैं। यह दीगर बात है कि नर्सिंग होम पहुंचने पर दीवारों पर लिखा होता है कि यहां पर भ्रूण लिंग की जांच नहीं की जाती है।