वाराणसी में जयगुरुदेव के कार्यक्रम में हुई भगदड़ में रायबरेली के आईटीआई कर्मी और उनकी पत्नी की मौत हो गई। शनिवार को देर शाम दंपती की मौत की खबर घर पहुंचते ही परिवारीजनों में कोहराम मच गया।
आसपास के लोगों का उनके प्रगतिपुरम कॉलोनी स्थित आवास पर मजमा लग गया। शुक्रवार को ही कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आईटीआई कर्मी और उनकी पत्नी वाराणसी गए हुए थे। माता-पिता की मौत की सूचना पर बेटा समेत अन्य परिवारीजन वाराणसी के लिए रवाना हो गए हैं।
रायबरेली शहर के प्रगतिपुरम कॉलोनी के मकान नंबर ई-153 में रहने वाले नवल किशोर मिश्रा (58) आईटीआई में ऑपरेटर पद पर कार्यरत थे। वे मूलरूप से अमेठी जिले के तिलोई तहसील क्षेत्र के पूरे मिश्रन मजरे राजा फत्तेपुर गांव के रहने वाले थे, लेकिन मौजूदा समय में वे प्रगतिपुरम कॉलोनी में परिवार के साथ रहते थे।
शुक्रवार को नवल किशोर अपनी पत्नी सावित्री (55) के साथ जयगुरुदेव के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बस से वाराणसी गए थे, जहां शनिवार को हुई भगदड़ में दंपती की मौत हो गई। देर शाम दंपती की मौत की सूचना घर पहुंची तो परिवारीजनों में रोना पिटना मच गया। रिश्तेदारों व मित्रों का घर पर जमावड़ा लग गया। माता-पिता की मौत की सूचना पर बेटा मुकेश रिश्तेदारों के साथ बनारस रवाना होे गया।
...और इस बार साबित हुआ दंपती का अंतिम सफर
रायबरेली। किसी को यह एहसास नहीं था कि प्रगतिपुरम कॉलोनी निवासी दंपती का जयगुरुदेव के कार्यक्रम में जाने का अंतिम सफर था। नवल किशोर और उनकी पत्नी सावित्री की मौत से परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। अपनों का खोने का गम परिवारीजन भूल नहीं पा रहे हैं। उनके परिवार में एक बेटा मुकेश है। बेटी सुषमा की शादी पांच साल पहले लखनऊ के मोहनलालगंज में हुई थी।
सूचना के बाद बेटी व दामाद नीलेश शुक्ला प्रगतिपुरम कॉलोनी स्थित घर पहुंचे। नवल किशोर मिश्रा शुक्रवार को अपनी पत्नी सावित्री मिश्रा के साथ बस से वाराणसी के लिए रवाना हुए थे, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनकी अंतिम यात्रा साबित होगी। वे चार भाइयों में सबसे बड़े थे। दूसरे नंबर पर हरी शंकर, तीसरे पर विनय शंकर व चौथे नंबर पर कृपा शंकर हैं।
कृपा शंकर ने बताया कि दो बड़े भाई भतीजे मुकेश के साथ बनारस गए हैं। अब उनको कौन सहारा देगा। भतीजे सत्यम मिश्रा ने कहा कि नवल किशोर उनके ताऊ हैं। घटना की सूचना मिलते ही सभी परेशान हो गए हैं कि कल घर से हंसते-बोलते हुए ताई के साथ घर निकले थे। दामाद नीलेश मिश्रा ने बताया कि सास-ससुर के साथ अचानक हुई दुर्घटना बहुत दुखद है।
घर में सभी का रो-रोकर बुरा हाल है। वे ही घर के कमाने वाले धार्मिक प्रवृत्ति के इंसान थे। दामाद की मानें तो जहां पर भी जयगुरुदेव का कार्यक्रम होता था, वहां वे सास के साथ जाया करते थे। किसी को एहसास नहीं हो रहा है कि वह सास-ससुर इस दुनिया में नहीं है।