स्टाफ और संसाधन का टोटा, कैसे हो जेल की सुरक्षा
रायबरेली। जिले से लेकर बाहरी अपराधियों की मौजूदगी के बावजूद जेल की सुरक्षा रामभरोसे है। जेल की बैरकों में क्षमता से अधिक बंदी ठूंस-ठूंसकर भरे हैं तो स्टाफ और संसाधन की कमी है।
कहने के लिए सीसीटीवी कैमरे तो लगे हैं, लेकिन वाच टावर और जैमर की व्यवस्था नहीं हो पाई है। सवाल उठता है कि मुट्ठी भर स्टाफ से सैकड़ों बंदियों की सुरक्षा कैसे की जाए।
माफिया डान मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद एक बार फिर जेलों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हैं। वैसे तो रायबरेली जिला कारागार की 11 बैरकों में बंदियों के रखने की क्षमता 400 है, लेकिन मौजूदा समय में इन बैरिकों में क्षमता से दोगुना बंदी भरे हैं।
इनकी संख्या 965 है। इन सैकड़ों बंदियों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे तो लगे हैं, लेकिन अन्य सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं।
खासकर जब स्टाफ की कमी है तो सुरक्षा को कैसे पुख्ता किया जाए। 68 बंदीरक्षकों के सापेक्ष 40 बंदीरक्षकों की तैनाती है।
पांच डिप्टी जेलरों के सापेक्ष तीन डिप्टी जेलर तैनात हैं। उसमें से भी एक डिप्टी जेलर का गैर जनपद स्थानांतरण हो गया है। उनके जाने के बाद दो ही डिप्टी जेलर बचेंगे।
यहां बंदियों का नेटवर्क प्रदेश के कई खूंखार अपराधियों से ताल्लुक होने की बात कही जा रही है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था और चाक चौबंद करने की जरूरत है।