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राजेंद्र प्रसाद के सिर बंधा अध्यक्ष का ताज व रमाकांत बने महामंत्री

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रायबरेली। जिला कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के चुनाव में गुरुवार को गहमागहमी के बीच मतदान के बाद मतगणना हुई। 144 अधिवक्ताओं में 142 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
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85 मत पाकर राजेंद्र प्रसाद यादव के सिर अध्यक्ष का ताज बंधा। वहीं 117 मत पाकर रमाकांत चौधरी महामंत्री निर्वाचित हुए। इसके अलावा अन्य पदाधिकारी निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए।


मतगणना के बाद परिणाम की घोषणा होते ही समर्थकों ने एक दूसरे का मुंह मीठा कराकर बधाई दी। पदाधिकारियों को माला पहनाकर स्वागत किया गया।


जिला कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन में अध्यक्ष व महामंत्री के पद के लिए दो-दो प्रत्याशी होने के कारण नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद गुरुवार को कलेक्ट्रेट में मतदान शुरू हुआ।
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मतदान का काम पूरा होने के बाद मतगणना हुई। मतगणना में अध्यक्ष पद के लिए राजेंद्र प्रसाद यादव ने 28 मतों के अंतर से जीत दर्ज कराई। उन्हें 85 मत मिले, जबकि प्रतिद्वंद्वी सुनील कुमार श्रीवास्तव को 57 मत मिले।


महामंत्री पद के लिए रमाकांत चौधरी ने 93 मतों के अंतर से जीत दर्ज कराई। उन्हें 117 मत मिले, जबकि प्रतिद्वंद्वी संतोष बहादुर सिंह को मात्र 24 मत मिले। चुनाव अधिकारी व एल्डर्स कमेटी के चेयरमैन विद्याशंकर यादव ने सभी परिणामों की घोषणा की।


निर्विरोध चुने गए एसोसिएशन के ये पदाधिकारी
कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के चुनाव में अध्यक्ष व महामंत्री के अलावा वरिष्ठ उपाध्यक्ष के लिए बद्री प्रसाद यादव, कोषाध्यक्ष पद के लिए रमाकांत विश्वकर्मा, कनिष्ठ उपाध्यक्ष के दो पदों के लिए राजेंद्र कुमार मौर्या व विश्वपाल सिंह, संयुक्त मंत्री के लिए महेंद्र प्रताप सिंह, अनिल कुमार द्विवेदी, राजेश कुमार यादव, वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य के लिए ईश्वर दयाल श्रीवास्तव, पंकज कुमार श्रीवास्तव, शैलेंद्र बहादुर सिंह, रामेंद्र सिंह, मोहित सिन्हा, सुरेश तिवारी, कनिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य के लिए सगीर अहमद खां, सुशील कुमार शुक्ला व सुभाष को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया।


बहिष्कार के बाद भी महामंत्री के दावेदार को मिल गए 24 मत
मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाने वाले व महामंत्री पद के लिए दावेदार संतोष बहादुर सिंह ने पहले ही चुनाव का बहिष्कार कर दिया था, लेकिन उन्हें इसके बाद भी 24 मत मिल गए।


संतोष का कहना है कि राज्य विधिज्ञ परिषद के निर्देश के बाद भी चुनाव कराया गया, जबकि चुनाव अधिकारी को परिषद के पत्र को रिसीव कराया गया था, लेकिन इसके बाद भी चुनाव कराया गया। परिषद में आगामी दो मार्च की तारीख तय की गई है। परिषद के निर्णय को ही स्वीकार किया जाएगा। गुरुवार को हुए मतदान का पूरी तरह से बहिष्कार किया गया है।
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