रायबरेली। कोरोना-ओमिक्रान के बाद खुले शिक्षण संस्थानों में बदलाव दिख रहा है। बच्चे उत्साहित होकर विद्यालय आ रहे हैं। जो बच्चे पहले स्कूल आने से कतराते थे अब वे भी खुशी-खुशी आ रहे हैं। वहीं शिक्षकों की जिम्मेदारी भी पहले से ज्यादा बढ़ गई है।
नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया है। स्कूलों में अब पहले से ज्यादा रौनक दिखाई देगी। कोरोना काल में प्रभावित पठन-पाठन को पटरी पर लाना किसी चुनौती से कम नहीं है। जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय विद्यालयों की संख्या 2298 तो यूपी बोर्ड के 332 विद्यालय संचालित हैं।
कक्षा एक से आठ तक करीब पौने तीन लाख बच्चे तो कक्षा 9 से 12 तक में सवा लाख बच्चे नामांकित हैं। इसके अलावा सीबीएसई, आईसीएसई और निजी प्राइमरी स्कूल भी हैं। कोरोना काल में दो साल स्कूल-कालेज से दूर रहे छात्र-छात्राओं की रुचि अब पढ़ाई में पहले से ज्यादा दिख रही है।
बच्चों में दिख रही पढ़ने की ललक, बने जागरूक
बछरावां। कोरोना काल में घरों के भीतर कैद रहने वाले बच्चों को स्कूलों में पहले की तरह माहौल नजर आने लगा है। इससे उनमें उत्साह है। यह बात जरूर है कि पहले मध्याह्न भोजन, कापी-किताबें, यूनिफॉर्म समेत अन्य सुविधाएं पाने के मकसद से बच्चे स्कूल आते थे अब उनमें पढ़ने की ललक दिख रही है। थुलेंडी के कक्षा आठ के बृजेश कुमार और कक्षा पांच की दीपाली, बछरावां की कक्षा पांच की अर्पिता सोनी और जोरावरखेड़ा की अंशिका कहती है कि पिछले दो सालों में स्कूल आने का ज्यादा मौका नहीं मिला। स्कूल खुले तो घरवाले जाने नहीं देते थे। अब तो स्कूल भागकर पहुंच जाते हैं। प्राथमिक विद्यालय बछरावां के हेडमास्टर बुद्धि प्रकाश अवस्थी कहते हैं कि जो बच्चे अब तक किताबी ज्ञान तक सीमित थे, वे भी अब इंटरनेट और सोशल मीडिया को जान गए हैं। कंपोजिट विद्यालय थुलेंडी की सहायक अध्यापक अनीता वर्मा कहती हैं कि कोरोना के बाद बच्चे स्वच्छता के प्रति जागरूक हुए हैं। कंपोजिट विद्यालय कन्नावां की सहायक अध्यापक सुनीता सिंह कहती हैं कि पहले बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुझान कम था, लेकिन अब उत्साहित रहते हैं। प्राइमरी स्कूल जोरावरखेड़ा की हेडमास्टर प्रभजीत कौर कहती हैं कि बच्चे अब पहले से ज्यादा जागरूक हैं।
जीवनशैली में हुआ बदलाव तो तौर-तरीके भी बदले
सलोन। न्यू स्टैंडर्ड पब्लिक स्कूल बगहा की छात्रा आधारिका सिंह कहती है कि कोरोना का भय अभी खत्म नहीं हुआ है। इसलिए बचाव के उपाय अपनाते हैं। निमिषा कान्वेंट स्कूल के छात्र कृष्णा राठौर बताते हैं कि हम लोग अब भी आपस में दूरी बनाकर रखते हैं। कोशिश है कि जो पढ़ाई प्रभावित हुई, उसे पटरी पर लाया जाए।
विद्यालयों के सामने बड़ी चुनौती
सलोन। न्यू स्टैंडर्ड पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य कामाक्षा सिंह कहती हैं कि बीते दो वर्षों में विद्यार्थियों के अध्ययन- अभ्यास में कमी आई है। इसे पूरा करना एक बड़ी चुनौती है। निमिषा कान्वेंट स्कूल के अर्थशास्त्र प्रवक्ता पंकज पांडेय कहते हैं कि पहले की तरह कक्षाओं में छात्र संख्या घटा दी गई है। जिससे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होता रहे। पठन-पाठन के साथ कोरोना से सुरक्षा के उपाय अपनाना जरूरी हो गया है।
शैक्षिक प्रक्रिया जोर-शोर से चल पड़ेगी
ऊंचाहार। एनटीपीसी स्थित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के हिंदी प्रवक्ता दुर्गेश चंद्र पांडेय कहते हैं कि अब वातावरण सामान्य हो रहा है। नया शैक्षिक सत्र शुरू हो गया है। नए जोश के साथ बच्चों का आना, प्रवेश लेना, विद्यालय की फुलवारी में मुस्कुराना और खिलखिलाना शुरू हो गया है। एक बार फिर जोरशोर से शैक्षिक प्रक्रिया चलेगी। प्राथमिक विद्यालय गोपालपुर उधवन के प्रधानाध्यापक अतीस कुमार कहते हैं कि कोरोना काल में ई-पाठशाला, मोहल्ला पाठशाला जैसे कई विकल्प अपनाए गए, फिर भी कहीं न कहीं कमी रह गई। बच्चे गणित में गिनती, जोड़-घटाना, गुणा भाग तक ही सीमित रहे। पढ़ने संबंधी कार्य भी साधारण ही रहा। अब हर बच्चे को पढ़ने योग्य बनाना है।