रायबरेली। कोरोना न सिर्फ लोगों की जिंदगी छीन रहा है, बल्कि उद्योग-धंधे को भी बेपटरी कर चौपट कर रहा है। मजदूरी करके अपने परिवार का पोषण करने वाले श्रमिकों में कोरोना को लेकर इस हद तक दहशत और भय व्याप्त होने लगा है कि वह फैक्ट्री जाने से ही कतराने लगे हैं।
इसी के चलते जिले में 40 फीसदी उद्योग धंधे पूरी तरह चौपट होने की कगार पर आने लगे हैं। संचालन से जुड़े लोगों ने आशंका जतायी है कि आने वाले समय में कोरोना की रफ्तार कुछ इसी तरह रही तो स्थिति और खराब हो जाएगी। फैक्टरी और उद्योग संचालक भी कोरोना के कहर से बेहाल हैं। उनको भी इसका सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है।
लोडिंग-अनलोडिंग का कार्य प्रभावित
व्यापारी नेता पंकज मुरारका खाद्यान्न का कारोबार करते हैं। पंकज कहते हैं कि एक साल बाद धंधा जब कुछ पटरी पर आने लगा तो फिर कोरोना ने कहर बरपा दिया। दहशत के चलते मजदूर काम पर नहीं आ रहे हैं।
इस वजह से खाद्यान्न के लोडिंग-अनलोडिंग का कार्य प्रभावित हो गया है। बाहर न तो माल जा पा रहा और न ही बाहर से माल आ पा रहा है। हालात यही रहे तो धंधा पूरी तरह से चौपट हो जाएगा।
न थमा कोरोना तो स्थिति होगी खराब
मिल एरिया थाने के पास स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में कोरोना को लेकर हाहाकार है। उद्योग धंधे प्रभावित हैं। लकड़ी का व्यवसाय करने वाले व्यापारी धर्मेद्र सोनकर कहते हैं कि कोरोना की वजह से 40 फीसदी धंधा चौपट हो गया है। श्रमिक काम पर आने से कतराने लगे हैं। किसी तरह धंधा पटरी पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। अगर कोरोना नहीं थमा तो स्थिति और बेहद खराब हो जाएगी।
40 फीसदी कामकाज प्रभावित
बछरावां में सीमेंट फैक्टरी का संचालित करा रहे रशिक आनंद गुप्ता कहते हैं कि कोरोना की वजह से फैक्टरी में 40 फीसदी कार्य प्रभावित हो गया है। दिक्कत इस बात की है कि श्रमिकों में कोरोना को लेकर भय और दहशत है। इस वजह से वह डर के मारे काम पर नहीं आ रहे हैं। हालांकि फैक्टरी में कोविड-19 की गाइडलाइन के तहत ही कार्य कराया जा रहा है। जिस तरह कोरोना अपना रूप दिखा रहा है, उससे आगे और धंधा चौपट होने के आसार दिख रहे हैं।
खरीदारी कौन करे, जान बचा रहे लोग
वाहनों का व्यवसाय करने वाले विजय रस्तोगी कहते हैं कि कोरोना की वजह से स्थिति फिर खराब हो गई है। कोरोना की दहशत के चलते स्टाफ कम हो गया है। लोग अपनी जान बचाने को संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में वाहनों की खरीदारी ठप पड़ी है।