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कोरोना का साया : अर्थी के लिए नहीं नसीब हो सके चार कंधे

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कंधा देने वाले न मिलने पर रोता युवक सुमित कुमार। - फोटो : RAIBARAILY
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डलमऊ (रायबरेली)। कोरोना का कहर ऐसा है कि अब अंतिम विदाई में चार कंधे भी नसीब नहीं हो रहे हैं। शनिवार को डलमऊ के गंगाघाट स्थित श्मशान घाट पर ऐसा ही हृदय विदारक दृश्य देखने को मिला। पिता की मृत्यु होने पर बेटा तीन लोगों के साथ वाहन पर शव लेकर घाट पहुंचा लेकिन वहां घाट तक अर्थी पहुंचाने के लिए कंधा देने वाला कोई नहीं था।
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बेटा गिड़गिड़ाया लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। कई बार अपने परिचितों को मोबाइल पर फोन कर अपनी पीड़ा बयां की लेकिन रिश्तेदारों ने भी किनारा कस लिया। यह सुन वह फफक पड़ा। उसे रोते देख घाट पर मौजूद लोगों ने शव को कंधा दिया और अर्थी को श्मशान घाट तक पहुंचाया। तब जाकर दो घंटे बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हो सकी।
दरअसल, रायबरेली शहर निवासी गोपाल कृष्ण चतुर्वेदी का शुक्रवार को निधन हो गया था। पुत्र सुमित कुमार ने अपने रिश्तेदारों व परिचितों को खबर दी। लेकिन संक्रमण के भय से कोई अंतिम दर्शन को घर नहीं पहुंचा।
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ऐसे में सुमित परिवार के बेहद करीबी तीन लोगों के साथ किसी तरह शव को वाहन से लेकर अंतिम संस्कार के लिए डलमऊ स्थित गंगाघाट पहुंचा। श्मशान घाट के नजदीक शव को वाहन से उतारकर रख दिया, लेकिन दाह संस्कार के लिए घाट किनारे तक शव को पहुंचाने के लिए चार कंधे नसीब नहीं हुए। अर्थी घाट किनारे ही पड़ी रही। सुमित ने काफी देर तक परिचितों का इंतजार किया लेकिन कोई नहीं पहुंचा।
इस पर उसने कुछ नाते-रिश्तेदारों को फोन किया और अपनी पीड़ा बयां की लेकिन कोई नहीं आया। यह सोच कर वह तेज-तेज से चिल्लाने लगा। उसके रोने की आवाज सुनकर घाट पर पहुंचे कुछ लोगों का दिल पसीजा और उन्होंने अर्थी को कंधा देकर घाट तक पहुंचाया।
इस वजह से करीब दो घंटे बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हो सकी। सुमित ने बताया कि पिता को घाट तक पहुंचाने के लिए चार लोग भी नसीब नहीं हो रहे थे। अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी उठाने वाला कोई नहीं था।
श्मशान घाट की साफ-सफाई नहीं
कोरोना के चलते श्मशान घाट पर शवों की संख्या बढ़ गई है। हर दिन 50 से ज्यादा शव अंतिम संस्कार के लिए पहुंच रहे हैं। कोरोना के चलते भीड़ कम ही दिख रही है। श्मशान घाट पर साफ-सफाई के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है। गंदगी फैली है। नगर पंचायत के अधिकारी साफ-सफाई को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। इस वजह से घाट पहुंचने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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