रायबरेली। शहर की खस्ताहाल सड़कें देखकर विकास की हकीकत को समझा जा सकता है। शहर की प्रमुख सड़कें ध्वस्त हैं। ऐसे में उन पर चलना हर कदम पर मुश्किल है। सरकार का गड्ढा मुक्त अभियान पूरी तरह से फेल है। हालात ये हैं कि इस समय शहर की प्रमुख सड़कों से गुजरना लोगों को मुश्किल हो रहा है।
कोई सड़क एक साल तो कोई डेढ़ साल पहले मरम्मत कराई गई थी। इस कार्य पर करीब 25 करोड़ से ज्यादा की धनराशि भी खर्च की गई। मरम्मत के नाम पर खूब कमीशनबाजी हुई। ठेकेदार पूरी तरह से बेलगाम रहे। खस्ताहाल सड़कों के लिए पालिका के अधिकारी कम जिम्मेदार नहीं हैं। मधुबन रोड, नया रोड समेत अन्य मार्ग पूरी तरह से बदहाल हैं। शहर क्षेत्र के 34 वार्डों में ढाई लाख की आबादी रहती है। हर दिन लाखों लोगों का शहर आना-जाना रहता है। ऐेसे में खस्ताहाल सड़कें मुसीबत का सबब बनी हैं।
जिला अस्पताल शहर का प्रमुख चौराहा है। जिला अस्पताल से सुपर मार्केट की सड़क गड्ढों में तब्दील है। गिट्टियां उखड़ आई हैं। हर दिन इस रोड से रोगियों समेत एक लाख से ज्यादा लोगों का आना-जाना रहता है। दुकानदार दिनेश कुमार, संजय अग्निहोत्री बताते हैं कि हवा चलने पर धूल दुकानों तक पहुंच जाती है। इससे कारोबार भी प्रभावित होता है। ऐसे में सड़क पर आवागमन करने वाले मुसाफिरों के अलावा दुकानदार परेशान हैं।
गड्ढा मुक्त अभियान की निकल रही हवा
रामकृपाल चौराहे से कैपरगंज और घंटाघर चौराहे से रेलवे स्टेशन को गई सड़क गड्ढों में तब्दील है। इन सड़कों पर सफर करना जान जोखिम में डालना है। घंटाघर पर ही प्रधान डाकघर है। इस रोड पर शहर के प्रमुख बाजार पड़ते हैं। बावजूद सड़कों की दशा देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार के गड्ढा मुक्त अभियान की हकीकत क्या है। व्यापारी रामसजीवन गुप्ता, अरविंद कुशवाहा, अर्जुन प्रजापति कहते हैं कि प्रमुख चौराहे वाली सड़कें भी गड्ढों में तब्दील हैं।
बारिश में तालाब बन जाती रोड
दो साल से ज्यादा समय से जेल रोड की तस्वीर नहीं बदल पाई है। इस रोड से प्रतिदिन करीब एक लाख लोगों का आना-जाना रहता है। बावजूद रोड की मरम्मत कराने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इसका खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। अक्षत तिवारी, दिनेश शुक्ल, रामअधार चौधरी कहते हैं कि बारिश में सड़क तालाब बन जाती है। आवागन में परेशानी होती है। रोड मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।- शत्रोहन सोनकर, नगर पालिकाध्यक्ष