शहर की ढाई लाख आबादी को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई अमृत योजना जांच के दायरे में आ गई है। गुणवत्तापूर्ण कार्य न होने पर नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने न सिर्फ नाराजगी जाहिर की है, बल्कि जांच के आदेश भी दिए हैं। योजना के तहत क्या-क्या गड़बड़ी की गईं, इसकी पूरी रिपोर्ट भी तलब की है। कार्य ठीक न होने के चलते ही पाइप लाइन बिछाने और पानी की टंकियां स्थापित होने के बाद भी पालिका की ओर से अब तक हैंडओवर नहीं किया गया है।
अमृत योजना के तहत शहरवासियों को भरपूर पानी उपलब्ध कराने के लिए 117 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। कार्यदायी संस्था को जलनिगम इसका काम सौंपा गया था। पाइप लाइन बिछाने के साथ ही पानी की टंकियां भी लगाई गईं। लेकिन शहर के विभिन्न स्थानों पर पाइप लाइन चोक कर गईं हैं। इससे सड़कों पर पानी भरा रहता है। इसलिए नगर पालिका ने इस काम को हैंडओवर करने से इनकार कर दिया है। गुरुवार को नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने पालिकाध्यक्ष पूर्णिमा श्रीवास्तव, उनके प्रतिनिधि मुकेश श्रीवास्तव, ईओ बालमुकुंद मिश्रा समेत अन्य पालिका अफसरों व कर्मचारियों के साथ बैठक करके शहर के विकास की हकीकत जानी। पालिकाध्यक्ष ने उनके सामने अमृत योजना का कार्य ठीक से न होने की बात कही। इस पर मंत्री ने पूरी रिपोर्ट तलब की और जांच के आदेश दिए।