एक जुलाई को परिषदीय स्कूल तो खुल गए, लेकिन पढ़ाई-लिखाई का माहौल कहीं भी देखने को नहीं मिला। कक्षा में कुछ लिखना-पढ़ना तो दूर स्कूलों में बच्चों और टीचरों की संख्या काफी कम रही।
एमडीएम तो कहीं भी नहीं बनवाया गया। आदेश के बाद भी स्कूलों में गंदगी का अंबार रहा। बीएसए रामसागर पति त्रिपाठी ने बछरावां ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक स्कूल नीमटीकर को सुबह चेक किया तो बच्चे कक्षा में कंचे खेलते मिले और टीचर आराम कर रहे थे।
पढ़ाई जैसा माहौल न पाकर वे गुस्सा हो गए और शिक्षकों को कठोर चेतावनी दी। सुबह साढ़े नौ बजे जगतपुर ब्लॉक के शंकरपुर स्कूल में टीचर तो मिले, लेकिन एक भी बच्चा नहीं आया था। एमडीएम भी नहीं बना।
नौ बजे पूर्व माध्यमिक स्कूल सूची में चार बच्चे ही आए थे। टीचर हेमलता स्कूल पहुंची। स्कूल में गंदगी का अंबार रहा। जिले में तमाम स्कूल बंद रहे। काफी टीचर पहले दिन स्कूल नहीं पहुंचे।
आदेश के बाद भी स्कूलों में साफ सफाई नहीं कराई गई। यही नहीं बच्चों के लिए स्कूलों में पीने के पानी की समुचित व्यवस्था भी देखने को नहीं मिली। अधिकांश स्कूलों में पहला दिन औपचारिकता में ही निपट गया।