अधिक कमाई की चाहत में स्कूल संचालकों ने नियम-कानून को ताक पर रख दिया है। मनमाने तरीके से स्कूली बसों व टेम्पो से बच्चे ढोए जा रहे हैं। स्कूल जाने वाले लाडलों पर हर दिन खतरा मंडराता है, लेकिन मनमाने तरीके से चलाई जा रही बसों पर शिकंजा नहीं कसा जा रहा है।
खास बात ये है कि एटा में हुए हादसे के बाद भी इससे कोई सबक नहीं लिया गया। नतीजतन शुक्रवार को भी मनमाने तरीके से बच्चे ढोए गए। एआरटीओ कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक यहां पर 155 स्कूली बसें और 52 मैजिक संचालित हैं।
स्कूल में टेम्पो नहीं लगाए गए हैं। बावजूद कई ऐसे स्कूल हैं, जहां पर टेम्पो से बच्चे ढोए जा रहे हैं। कुछ ऐसी बसें हैं, जो जर्जर हैं। फिर भी उनकी रंगाई-पुताई कर सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। एलपीजी किट लगे वाहन भी दौड़ाए जा रहे हैं। जो कोर्ट के निर्देश हैं, उनका अनुपालन नहीं हो रहा है।
परिवहन विभाग के अफसरों के मुताबिक जिले में अलग-अलग बसें होती हैं। इसमें 42, 52, 32 और 22 सीटर बसें होती हैं। यदि बडे़ छात्र हैं तो जितने सीटें हैं, उतने छात्र-छात्राएं बैठाए जाने का नियम है। यदि छोटे बच्चे यानि कक्षा चार, पांच के बच्चे हैं तो इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है।
पर ऐसा नहीं हो रहा है। जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश श्रीवास्तव का कहना है कि एटा की घटना बहुत दुखद है। स्कूल संचालकों को नियम के तहत गाड़ियों का संचालन करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा न करने पर कार्रवाई की जाएगी।
इन मानकों को पूरा करना होता जरूरी - बस पर स्कूल का व मोबाइल नंबर दर्ज हो। - चालक का नाम व मोबाइल नंबर बस में लिखा हो। - चालक का कार्मिशियल लाइसेंस पांच साल पुराना हो। - बस पर चालक के लाइसेंस की वैधता लिखी हो। - बस में अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था हो।
कोई हादसा होने पर दवाइयों की व्यवस्था हो।- बच्चों के लिए बस पर नेक रेस्ट की व्यवस्था हो।- बच्चों के ब्लड ग्रुप की जानकारी भी दर्ज हो।- ड्राइवर व क्लीनर में वर्दी में होना चाहिए।- चालकों के पास बच्चोें के नाम और फोन नंबर लिखा रजिस्टर हो।
एआरटीओ प्रवर्तन अजय यादव का कहना है कि एटा में हुए हादसे के बाद सख्ती बरती जा रही है। शुक्रवार को चेकिंग चलाकर आठ स्कूली बसों का चालान किया गया। सभी स्कूल संचालकों को सख्त हिदायत दी गई है कि जो नियम हैं, उसी के तहत गाड़ियों का संचालन किया जाए। ऐसा न करने पर कार्रवाई की जाए।