रायबरेली। कमला नेहरू एजूकेशन सोसाइटी से जुड़़े भूमि घोटाले के मामले में पूर्व एडीएम, नजूल लिपिक और सोसाइटी के सचिव के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई है। ये चार्जशीट गुपचुप तरीके से दो सप्ताह पहले दाखिल की गई है। पुलिस की विवेचना में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर किया और जमीन फ्री होल्ड करवा ली थी। पूर्व सांसद शीला कौल के बेटे समेत पांच आरोपियों की पहले ही मौत हो चुकी है। अन्य की संलिप्तता की जांच चल रही है।
शहर के सिविल लाइंस चौराहा पर 12640 वर्ग मीटर (करीब पांच बीघा) भूमि कमला नेहरू एजूकेशन सोसाइटी के नाम दर्ज है। वर्ष 2021 में डीएम के निर्देश पर तत्कालीन एडीएम प्रेम प्रकाश उपाध्याय ने सदर कोतवाली में प्रशासनिक अधिकारियों और सोसाइटी से जुड़े समेत 12 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि सोसाइटी के नाम की गई भूमि का फर्जी तरीके से फ्री होल्ड किया गया। इसकी विवेचना चंदापुर थाना प्रभारी अरविंद सिंह कर रहे थे।
विवेचक की तरफ से पूर्व एडीएम वित्त एवं राजस्व मदनपाल आर्य, नजूल लिपिक रामकिशुन श्रीवास्तव, कमला नेहरू ट्रस्ट के सदस्य सुनील तिवारी के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई है। विवेचना में पाया गया है कि इन तीनों आरोपियों ने सरकारी दस्तावेजों के साथ हेरफेर करते हुए गलत तरीके से भूमि ट्रस्ट के नाम कराई। हालांकि इस प्रकरण से जुड़े पांच आरोपियों नजूल लिपिक छेदीलाल जौहरी, सोसाइटी के सचिव ट्रस्ट सुनील देव, तहसीलदार कृष्णपाल, पूर्व सांसद शीलाकौल के बेटे एवं सोसाइटी अध्यक्ष विक्रम कौल, ट्रस्ट के प्रशासनिक अधिकारी विंध्यवासिनी की पहले ही मौत हो चुकी है।
कई अन्य राजस्व कर्मियों की बढ़ेंगी मुश्किलें
सोसाइटी के नाम पर किए गए भूमि घोटाले की विवेचना अभी चल रही है। ऐसे में कई अन्य राजस्वकर्मियों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। विभागीय सूत्रों का दावा है कि उप निबंधक, राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) और एक लेखपाल समेत अन्य लोगों के खिलाफ विवेचना अभी जारी है।
करोड़ों रुपये की है जमीन, राजनीतिक दखल भी रहा
लखनऊ-प्रयागराज हाईवे पर शहर के प्रमुख चौराहे सिविल लाइंस पर यह भूमि स्थित है। जमीन की कीमत करोड़ों में है। मौजूदा समय में यह भूमि प्रशासन के हवाले है। प्रशासन की तरफ से वर्ष 2020 में भूमि से अवैध कब्जे को खाली करा दिया गया था। चार साल से इस मामले की विवेचना चल रही है, लेकिन पड़ताल पूरी नहीं हो सकी है। राजनीतिक रस्साकसी भी इस भूमि को लेकर ज्यादा रही है। यही वजह रही कि विवेचना कई दफा बदली गई।
अब सीओ लालगंज को सौंपी गई है विवेचना
भूमि घोटाले के मामले की विवेचना अब सीओ लालगंज अमित सिंह को सौंपी गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस प्रकरण में शामिल अन्य कई आरोपी जल्द पुलिस की जांच के दायरे में आएंगे। हालांकि सीओ का कहना है कि कोर्ट की तरफ से दाखिल की गई चार्जशीट पर आपत्ति जताई गई है। अब नए सिरे से जांच करेंगे।