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गैंग के सदस्यों को बेपर्दा करने के लिए निकलवाई जा रही सीडीआर

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रायबरेली। इंस्टीट्यूट ऑफ बैकिंग पर्सनल सेलेक्शन मुंबई (आईबीपीएस) की भर्ती प्रक्रिया में बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण में सॉल्वर समेत तीन जालसाजों के पकड़े जाने के बाद पुलिस पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नौकरी दिलाने के नाम पर सक्रिय गैंग के सरगना कौन-कौन लोग हैं। इसके लिए पुलिस पकड़े गए जालसाजों के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिपोर्ट (सीडीआर) निकलवा रही है, ताकि पता चल सके यह जालसाज किन-किन लोगों के संपर्क में रहे और उनसे क्या-क्या बातें हुई।
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शुरुआती जांच में पुलिस को बिहार के साथ ही यूपी में ही गैंग के सक्रिय होने की आशंका है। साथ ही इस गोरखधंधे में कई बैंक अफसरों के भी मिलीभगत होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस का मानना है कि बैंक अफसरों की मिलीभगत के चलते इस तरह की जालसाजी करना आसान नहीं है। पुलिस जल्द गैंग के बड़े जालसाजों को बेपर्दा करने का दावा कर रही है।
उधर, शनिवार को पकड़े गए जालसाज को पूछताछ के बाद पुलिस ने सलाखों के पीछे भेज दिया। गौरतलब है कि आईबीपीएस से परीक्षा व अन्य प्रक्रिया पूरी होने के बाद बैंकों की डिमांड पर क्लर्क व अन्य पदों के लिए अभ्यर्थी उपलब्ध कराए जाते हैं। बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के 300 पदों को भरने के लिए आईबीपीएस से 800 अभ्यर्थी मिलने के बाद बायोमीट्रिक व अन्य जांच के साथ ही जॉइनिंग की प्रक्रिया चल रही है।
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शहर के सिविल लाइंस इलाके के हेड ऑफिस में बायोमेट्रिक व शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच के दौरान शुक्रवार को सतर्कता टीम ने बिहार प्रांत के ग्राम कुबड़ा पोस्ट परिऔना नूरसराय नालंदा निवासी कन्हैयालाल और बिहार के ही गोविंदपुर बाईपास रोड पटना निवासी राजीव रंजन को पकड़ा था। पुलिस ने केस दर्ज करके दोनों को जेल भेज दिया था।
शनिवार सुबह राज नगर गाजियाबाद निवासी मनीष कुमार बायोमीट्रिक व दस्तावेजों की जांच के दौरान पकड़ा गया था। मनीष बिहार प्रांत के रामपुर आर्मी डिगवारा सारन निवासी अर्जुन कुमार के नाम पर मुख्य व लिखित परीक्षा देने के बाद शनिवार को बायोमीट्रिक व अन्य प्रक्रिया पूरी कराकर उसे जॉइन कराने के लिए आया था। 11 लाख रुपये में डील हुई थी।
काम होने के बाद उसे पूरा रुपया मिलना था। सॉल्वर के गिरफ्तार होने की जानकारी होते ही आवेदक अर्जुन कुमार भाग निकला था। देर रात इस मामले में पुलिस ने मनीष और अर्जुन के खिलाफ केस दर्ज किया था। मनीष जेल भेज दिया गया है, जबकि अर्जुन की गिरफ्तारी के लिए पुलिस प्रयास कर रही है।
सदर कोतवाल अतुल सिंह का कहना है कि पकड़े गए तीनों जालसाजों के मोबाइल फोन की काल डिटेल निकलवाई जा रही है। इसके जरिए पता किया जाएगा कि जालसाजों के संपर्क में और कौन-कौन लोग थे। वैसे बिहार के साथ ही यूपी में इस गैंग के सक्रिय होने की बात सामने आ रही है। कई बैंक अफसरों के भी मिलीभगत होने की भी आशंका है।
सीडीआर मिलने के बाद जांच में और तेजी होगी। जो भी लोग जालसाजों के संपर्क में हैं, उन पर शिकंजा कसा जाएगा। बैंक में भर्ती घोटाले की मामले की जांच सिविल लाइंस चौकी इंचार्ज महेंद्र सिंह को सौंपी गई है। जांच मिलने पर विवेचक की ओर से मामले की पड़ताल शुरू कर दी गई है। कोतवाल का कहना है कि इस पूरे मामले की तफ्तीश सिविल लाइंस चौकी इंचार्ज को दी गई है।
मामले में जो भी शामिल होगा, उस पर सख्त कार्रवाई होगी। जालसाज मनीष को पूछताछ के बाद रविवार को जेल भेजा गया। विवेचक महेंद्र सिंह बताते हैं कि जालसाज से पूरे घटनाक्रम के बारे में पूछताछ की गई। इस दौरान वह कुछ भी सही बात नहीं बताई। बस गुमराह करने की कोशिश करता रहा। उससे पूछा गया कि उसके साथ ही नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे इस गैंग में कौन-कौन लोग शामिल हैं तो उसका जवाब था कि उसे कुछ नहीं पता। विवेचक का कहना है कि जल्द पूरे घटनाक्रम की हकीकत सामने होगी।
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