रायबरेली। नहरों में पानी नहीं आ रहा है। वहीं, दूसरी ओर कम वोल्टेज से राजकीय नलकूप भी नहीं चल पा रहे हैं। इससे किसान धान की नर्सरी नहीं तैयार कर पा रहे हैं। उड़द और हरे चारे की फसल भी सूख रही है। कम वोल्टेज से नलकूप की मोटर जलने का खतरा बना रहता है। अभी यह हाल है, जब धान की रोपाई होगी, तो समस्या और विकराल रूप धारण करेगी।
इस ओर पावर कॉर्पोरेशन के अभियंता और राजकीय नलकूप के अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। भीषण गर्मी में किसानों को धान की नर्सरी और फसलाें की सिंचाई के लिए पानी की जरूरत है। इसके बावजूद नहरें सूखी हैं। राजकीय नलकूप भी दगा दे रहे हैं। लो वोल्टेज और ट्रिपिंग की समस्या से नलकूप नहीं चल पा रहे हैं। सलोन, डलमऊ, ऊंचाहार और महराजगंज में वोल्टेज इतना कम आ रहा है कि नलकूप चलते-चलते बंद हो जाते हैं। इससे किसान सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं।
खीरों के रामजियावन, सलोन के रामसिंह, महराजगंज में विश्वनाथ त्रिवेदी ने बताया कि बारिश न होने से किसान धान की नर्सरी नहीं तैयार कर पा रहे हैं। नर्सरी डालने का समय निकला जा रहा है। यदि समय से धान की रोपाई नहीं हो पाई, तो उत्पादन पर असर पड़ेगा।
21 दिन में खराब हो गईं सात मोटरें
वोल्टेज कम होने के चलते नलकूप की मोटरें खराब हो रही है। पिछले 21 दिन में राजकीय नलकूप की सात मोटरें खराब हो गईं। नलकूप की मोटरें खराब होने के बाद उनकी मरम्मत में चार से पांच दिन लग जाते हैं। राजकीय नलकूप में वर्कशॉप के कर्मियों का कहना है कि कम वोल्टेज की वजह से मोटरें खराब होती हैं। यदि वोल्टेज ठीक रहता है, तो मोटर जलने का खतरा कम रहता है।
और बढ़ेगी बिजली की समस्या
मौजूदा समय में बिजली की मांग 330 मेगावाट है। धान की रोपाई का काम शुरू होगा, तो बिजली की मांग और बढ़ेगी। अभी तक किसान धान की नर्सरी तैयार नहीं कर पाए हैं। धान की रोपाई के समय पानी की अधिक जरूरत रहती है। यदि नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो समस्या और बढ़ेगी।
जिले में 418 राजकीय नलकूप हैं। कहीं-कहीं पर वोल्टेज कम होने की समस्या पर नलकूपों को चलवाने में समस्या हो रही है।
- एके आजाद, अधिशासी अभियंता, राजकीय नलकूप विभाग