रायबरेली। एम्स के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन और ब्लड सेंटर विभाग की ओर से मंगलवार को इंडिविजुअल डोनर न्यूक्लिक एसिड टेस्टिंग (आईडी-नॉट) जांच की सुविधा शुरू की गई। इंडियन सोसाइटी ऑफ ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के सहयोग से सीएमई भी आयोजित हुई। एम्स की निदेशक प्रो. अमिता जैन ने बताया कि इस जांच में ट्रांसफ्यूजन से फैलने वाले संक्रमणों एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी के जेनेटिक मटीरियल का पता चल सकेगा।
उन्होंने बताया कि इससे संक्रमण की पहचान शुरुआती चरण में ही हो जाती है, जबकि पारंपरिक एंटीबॉडी-बेस्ड टेस्ट शायद उस समय संक्रमण का पता न लगा पाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि एम्स में यह जोच शुरू होने से मरीजों को दिए जाने वाले ब्लड और ब्लड कंपोनेंट्स की सुरक्षा और मजबूत होगी। सीएमई में पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के प्रो. रत्ती राम शर्मा, एसजीपीजीआई लखनऊ की प्रो. (प्रीति एल्हेंस और प्रो. अनुपम वर्मा ने ब्लड सेफ्टी, वैश्विक और भारतीय परिदृश्य ने आदि विषयों पर चर्चा की। इस मौके पर डीन प्रो. नीरज कुमारी, अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीरज श्रीवास्तव, उप निदेशक प्रशासन कर्नल अखिलेश सिंह आदि मौजूद रहे।