रायबरेली। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक को विस्तारित कर ब्लड सेपरेटर मशीन लगाने के प्रस्ताव पर ग्रहण लगा है। दस साल पहले शासन को भेजा गया इस आशय का प्रस्ताव फाइलों में बंद पड़ा है। इससे डेंगू व एईएस से पीड़ित मरीजों को ब्लड कंपोनेंट के बतौर प्लेटलेट्स, आरबीसी और प्लाज्मा के लिए निजी केंद्रों की दौड़ लगाने के साथ ही मनमानी कीमत चुकाने की परेशानी उठानी पड़ रही है। जिला अस्पताल प्रशासन की तरफ से ब्लड बैंक को विस्तारित किए जाने के संबंध में भेजे गए प्रस्ताव को शीघ्र अमल में लाने के लिए पत्र भी लिखे जा चुके हैं।
वर्ष 2012 में जिला अस्पताल के ब्लड बैंक को विस्तारित कर इसमें ब्लड सेपरेटर मशीन लगाने का एक प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया था। दस साल बीत जाने के बाद भी ब्लड बैंक को विस्तारित करने का यह प्रस्ताव फाइलों में गुम पड़ा है।
जिले में हर साल डेंगू के सीजन में इस प्रस्ताव को अमल में लाने की कवायद चिट्ठी पत्री के माध्यम से होने के बाद फिर चुप्पी साध ली जाती है। जिला अस्पताल में हर माह औसतन 50 से अधिक ऐसे मरीज आते हैं, जिन्हें प्लेटलेट्स की जरूरत होती है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट मिलने की सुविधा न होने के कारण इनमें से अधिकांश मरीजों को लखनऊ रेफर करना पड़ रहा है।
निजी ब्लड बैंक के सहारे मरीज
परेशान डेंगू अथवा एईएस पीड़ित मरीज ब्लड कंपोनेंट के लिए शहर में निजी तौर पर संचालित एक ब्लड बैंक के भरोसे पर हैं। चैरिटेबल ट्रस्ट के तहत संचालित इस ब्लड बैंक से ही जरूरत पड़ने पर मरीज को प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और सीआरबीसी उपलब्ध हो पा रहा है।
करीब 10 साल पहले ब्लड बैंक के विस्तार का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन अब तक ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन की व्यवस्था नहीं हो सकी है। वर्तमान में मरीजों के इलाज के लिए प्लेटलेट्स की डिमांड अधिक है। मरीजों को दवाओं के माध्यम से स्वस्थ करने का प्रयास किया जाता है। जिला अस्पताल में सेपरेटर मशीन जल्द ही मुहैया कराने की डिमांड एक बार फिर से पत्र लिखकर शासन से की गई है।
डॉ. महेंद्र मौर्या, सीएमएस जिला अस्पताल