रायबरेली। जिले में कोरोना का कहर अभी थमा भी नहीं था कि ब्लैक फंगस ने दस्तक दे दी है। ब्लैक फंगस की चपेट में आने से शनिवार को शहर निवासी एक महिला समेत दो लोगों की मौत हो गई।
ब्लैक फंगस से ग्रसित तीन मरीजों को केजीएमयू में भर्ती कराया गया है। इसमें से एक मरीज के एक आंख की रोशनी भी चली गई है। जिले में ब्लैक फंगस का कहर अचानक बढ़ने से हड़कंप मच गया है। जिले में अब तक जितने भी संक्रमित मिले हैं, वे सभी कोरोना की चपेट में आ चुके हैं।
जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डीएस अस्थाना ने बताया कि शहर के 848 न्यू राना नगर निवासी 40 वर्षीय महिला कोरोना संक्रमित होने के बाद शहर के एक निजी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराई गई थी।
जांच में ब्लैक फंगस की पुष्टि होने के बाद महिला को केजीएमयू लखनऊ में भर्ती कराया गया, जहां महिला की मौत हो गई है। सलोन क्षेत्र के पूरे पिंडौर के रहने वाले कोरोना संक्रमित 65 वर्षीय वृद्ध की ब्लैक फंगस के चपेट में आने के बाद एम्स के एल-3 अस्पताल में मौत हो गई है।
इसके अलावा ब्लैक फंगस के चपेट में आने के बाद छतोह के पूरे रानी गांव निवासी 36 वर्षीय युवक चपेट में आ गया है। उसकी एक आंख की रोशनी चली गई है।
इसके अलावा सलोन क्षेत्र के उमरी गांव निवासी 31 वर्षीय युवक और शहर के मलिकमऊ कॉलोनी की रहने वाले 45 वर्षीय महिला को केजीएमयू लखनऊ में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। जिले में अब तक ब्लैक फंगस के चपेट में आए सभी पांचों मरीज कोरोना संक्रमित रहे हैं। जिले में अब फंगस का खतरा बढ़ने के बाद हड़कंप मच गया है।
ब्लैक फंगस से लक्षण व बचाव
एनएचएम के जिला शहरी समन्वयक विनय पांडेय का कहना है कि नाक में दर्द, खून आना या नाक बंद होना, नाक में सूजन, दांत या जबड़े में दर्द या दांतों का गिरना, आंखों के सामने धुंधलापन या दर्द, न दिखना या दो-दो दिखाई देना, बुखार, सीने में दर्द, खांसी, सांस लेने में दिक्कत, खून की उल्टियां ब्लैक फंगस के लक्षण हैं।
यह कभी-कभी दिमाग पर भी असर डालता है। इससे बचने के लिए किसी निर्माणाधीन इलाके में जाने पर मास्क पहनें, बगीचे में जाएं तो पैंट, फुल आस्तीन की शर्ट व ग्लब्स पहनें और ब्लड ग्लूकोज स्तर को जांचते रहें।
हल्के लक्षण दिखने पर जल्द डॉक्टर से संपर्क करे। कोविड के रोगियों में अगर बार-बार नाक बंद होती हो या नाक से पानी निकलता रहे, गालों पर काले या लाल चकत्ते दिखने लगें, चेहरे के एक तरफ सूजन हो या सुन्न पड़ जाए, दांतों और जबड़े में दर्द, कम दिखाई दे या सांस लेने में तकलीफ हो तो यह ब्लैक फंगस हो सकता है।
मधुमेह के रोगी खुद को बचाएं, खतरा ज्यादा: नेत्र सर्जन
ब्लैक फंगस का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में शुगर रोगी कोरोना के साथ ही खुद को फंगल इंफेक्शन से बचाने का प्रयास करें। आर्यावर्त हॉस्पिटल के निदेशक व नेत्र सर्जन डॉ. धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि फंगल इंफेक्शन का खतरा डायबिटिक लोगों को ज्यादा है, क्योंकि मधुमेह के रोगियों के कोरोना संक्रमित होने के बाद उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर हो जाती है।
ब्लैक फंगस होने पर आंखों की रोशनी चली जाती है। स्टेरॉयड के इस्तेमाल में समय और डोज का पूरा ध्यान रखें या फिर बंद ही कर दें। इम्यूनोमॉड्यूलेटिंग दवाओं का इस्तेमाल करना बंद कर दें। इसके साथ ही एंटीबायोटक्सि और एंटीफंगल दवाइयों का सावधानी से इस्तेमाल करें।
ब्लैक फंगस से बचने के लिए बरतें जरूरी सावधानी: सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीरेंद्र सिंह का कहना है कि यह दुर्लभ फंगल इंफेक्शन है, जो किसी व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर होता है। कोरोना और डायबिटीज के मरीजों के लिए यह इंफेक्शन और ज्यादा खतरनाक साबित है।
यह शरीर में तेजी से फैलता है। म्यूकोरमाइकोसिस इंफेक्शन नाक, आंख, दिमाग, फेफड़े या फिर स्किन पर भी हो सकता है। थोड़ी भी दिक्कत होने पर मरीजों को अस्पताल जरूर पहुंचाएं। समय से इलाज शुरू होने पर ब्लैक फंगल से मरीज को बचाया जा सकता है।