अमेठी जिले के सिंहपुर ब्लॉक में शुक्रवार को एक बैंक मैनेजर ने मानवता को तार-तार कर दिया। इलाज के लिए रुपया निकालने पहुंचे बीमार बुजुर्ग की एक नहीं सुनी गई। धन निकासी पर उनसे आधार कार्ड लेकर आने की बात कही जाती रही। आखिर में इलाज के अभाव में बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया।
बुजुर्ग की मौत से गुस्साए ग्रामीणों ने शव रखकर मार्ग जाम कर दिया। सभी बैंक मैनेजर को हटाने और शव का पोस्टमार्टम कराने की मांग कर लगे। सूचना पर पुलिस पहुंची और समझा-बुझाकर शांत कराया। करीब दो घंटे तक आवागमन ठप होने से मुसाफिरों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
पूरे ठकुराइन मजरे पन्हौंना गांव निवासी विश्राम (70) बीमार चल रहे थे। इलाज कराने के लिए उन्हें दो हजार रुपये की जरूरत थी। सुबह वह उत्तर प्रदेश बड़ौदा ग्रामीण बैंक रुपया निकालने गए थे। साथ में उनके परिवारीजन भी थे। बताते हैं कि तीन घंटे तक वह बैंक में इधर-उधर घूमते रहे लेकिन धन निकासी नहीं हो पा रही थी।
परिवारीजनों के मुताबिक बैंक मैनेजर आधार कार्ड लेकर आने की बात कह रहे थे, तभी धन निकासी होने की बात कह रहे थे। जब उनकी हालत बिगड़ने लगी तो बैंक मैनेजर ने उनका विड्रॉल लेकर रुपया देने की बात कहने लगे। इसी बीच विश्राम की मौत हो गई। बुजुर्ग की मौत की सूचना मिलने पर ग्रामीण एकत्र हो गए।
गुस्साए ग्रामीणों ने अहोरवा भवानी-खारा मार्ग पर शव रखकर जाम कर दिया। इससे दोनों तरफ का आवागमन ठप हो गया। गुस्साए ग्रामीण बैंक मैनेजर के खिलाफ कार्रवाई करने और शव का पोस्टमार्टम कराने की मांग करने लगे। इस दौरान बैंक मैनेजर के खिलाफ नारेबाजी के साथ जमकर प्रदर्शन किया।
इसकी सूचना मिलते ही शिवरतनगंज थानेदार दिनेश यादव, इन्हौंना चौकी इंचार्ज बाढ़ू यादव फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों को मामले की जांच कराकर कार्रवाई करने और शव का पोस्टमार्टम कराने की बात कही, जिस पर सभी शांत हुए।
ग्रामीण प्रभात द्विवेदी, विनय पासी, मिंटू सिंह, राजकिशोर, लालू का कहना है कि बैंक मैनेजर की लापरवाही से परेशानी हो रही है। जल्द समस्या नहीं सुधरी तो इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से की जाएगी।
उधर, बैंक मैनेजर बीके लाल श्रीवास्तव का कहना है कि बुजुर्ग के बीमार होने की जानकारी नहीं थी। फारमेल्टी पूरा करके उनके धन निकासी की बात कही जा रही थी। बैंक आने वाले ग्राहकों से अच्छा व्यवहार किया जाता है। कोई लापरवाही नहीं बरती गई है।