रायबरेली। विलय के बाद बंद हुए परिषदीय विद्यालयों के भवनों में बाल वाटिकाएं संचालित होंगी। बाल वाटिका में तीन से छह वर्ष तक के बच्चे पढ़ना-लिखना सीखेंगे। प्रथम चरण में विलय के अंतर्गत जिले के 129 स्कूल बंद हुए हैं जिनका सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा और बाल विकास विभाग को सौंपी गई है। इन दोनों विभागों के अधिकारी संयुक्त रूप से निरीक्षण कर आख्या तैयार कर रहे हैं। इससे पता चलेगा कि क्या व्यवस्थाएं हैं और क्या करना बाकी है।
उन परिषदीय विद्यालयों का विलय नजदीकी स्कूलों में किया गया है जहां बच्चों की संख्या कम है। प्रथम चरण में विकास क्षेत्रों से आए प्रस्तावों के आधार पर 129 स्कूलों का विलय किया जा चुका है। ऐसे में इन स्कूलों में ताला लटकने के कारण भवन खाली हो चुके हैं।
दूसरे चरण के विलय की प्रक्रिया चल रही है। खाली हुए स्कूलों में आंगनबाड़ी केंद्र के लिए बाल वाटिकाएं संचालित करने के आदेश मिले हैं जिसके लिए रूपरेखा बनाई जा रही है। फिलहाल अभी खाली स्कूल भवनों और उसके आसपास के आंगनबाड़ी केंद्रों का सर्वे शुरू करा दिया गया है ताकि सही स्थिति पता चल सके। यह भी जानकारी हो सकेगी कि बाल वाटिका संचालित करने के लिए क्या-क्या नई व्यवस्थाएं करनी होंगी।
सर्वे की जिम्मेदारी संबंधित विकास क्षेत्रों के खंड शिक्षा अधिकारियों और बाल विकास परियोजना अधिकारियों को सौंपी गई है जिन्हें संयुक्त रूप से निरीक्षण कर निर्धारित प्रपत्र पर आख्या देनी है। इसमें बताना होगा कि खाली स्कूल भवन में कितने कमरे हैं। शौचालय, पेयजल, फर्नीचर व अन्य संसाधनों की स्थिति भी बतानी होगी।
स्कूल भवन में पहले से आंगनबाड़ी केंद्र चल रहा था या नहीं, अगर नहीं तो कितनी दूरी पर आंगनबाड़ी केंद्र है और उसकी क्या स्थिति है। स्कूल से आंगनबाड़ी केंद्र की दूरी कितनी है। जिला समन्वयक (एमआईएस) अविलय सिंह ने बताया कि खाली विद्यालय भवन में आंगनबाड़ी केंद्र चल सकेगा या नहीं, इस बारे में भी स्पष्ट बताना होगा। सभी क्षेत्रों से आख्या आने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।