पंचायत चुनाव नजदीक आ गए हैं। रैपिड सर्वे का काम भी पूरा हो गया है। सर्वे ने सभी गणित को बिगाड़ दिया है। जिले के गांवों में 47 प्रतिशत पिछड़ी, 32 प्रतिशत एससी व 20 प्रतिशत सामान्य जातियां इस बार पंचायत चुनाव में नेताजी के भाग्य का फैसला करेंगी।
17 ब्लॉकों में पिछड़ी जाति की जनसंख्या सबसे अधिक है और एक ब्लॉकों में अनुसूचित जाति सबसे आगे हैं। पंचायत चुनाव को लेकर गांवों में सरगर्मी बढ़ी गई है।
ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के चुनावों में ताल ठोंकने का मना बना चुके नेता अब सामने आने लगे हैं। कई ने तो अपना काम भी शुरू कर दिया है। लेकिन इस बार पिछड़ी जाति की जनसंख्या जिले में सबसे अधिक है।
जिले के ग्रामीण क्षेत्र की जनसंख्या 26,21,922 है। इसमें पिछड़ी जाति की जनसंख्या 12,34,379, अनुसूचित जाति 8,47,620, सामान्य जाति 5,38,636 और अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या 1287 है। पुनर्गठन के बाद जिले में 989 ग्राम पंचायतें हो गई हैं।
पिछड़ी जाति की जनसंख्या अधिक होने के कारण इस बार वे चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं। जिले में केवल बछरावां ब्लॉक में अनुसूचित जाति की जनसंख्या सबसे अधिक है।
बाकी जगतपुर, ऊंचाहार, सतांव, डलमऊ, महराजगंज, खीरों, हरचंदपुर, शिवगढ़ सहित 17 ब्लॉकों में पिछड़ी जाति की जनसंख्या सबसे अधिक है।