रायबरेली। प्रथम अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनीशा की कोर्ट ने मिलावटखोरी के एक 24 साल पुराने वाद का निस्तारण करते हुए फैसला सुनाया। मिलावटी दूध बेचने के आरोपी दिनेश सिंह को साक्ष्य व गवाही के आधार पर दोषी करार माना गया। कोर्ट ने दोषी को कोर्ट उठने तक की सजा सुनाने के साथ ही एक हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। जुर्माना धनराशि जमा न करने पर दोषी को एक माह के साधारण कारावास की सजा भुगतना होगी।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने वर्ष 2001 में शिवगढ़ निवासी दिनेश सिंह के पास से दूध का नमूना लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा था। जांच में दूध का नमूना असुरक्षित श्रेणी में फेल आया। अर्थात इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए जानलेवा स्तर तक हानिकारक हो सकता था। इसके बाद आरोपी के खिलाफ एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया था।
प्रथम अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनीशा ने मामले की सुनवाई करते हुए दूध विक्रेता दिनेश सिंह को धारा खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम 1954 के तहत दोषी मानते हुए सजा सुनाई। अभिहित अधिकारी डॉ. सीआर प्रजापति ने बताया कि एसीजेएम कोर्ट ने दोषी पर एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। (संवाद)