रायबरेली। सीएम योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट पर भ्रष्टाचार की चोट पहुंचाई जा रही है। पुलिस लाइंस में करोड़ों की कीमत से जिन बैरकों का निर्माण कराया जा रहा है, उनमें न तो मानक का ख्याल रखा जा रहा है और न ही मौरंग-सीमेंट की गुणवत्ता ठीक है।
यही नहीं कमीशनबाजी के चक्कर में बैरक बनवाने के लिए कामर्शियल बिजली कनेक्शन तक नहीं लिया गया। पुलिस लाइंस की बिजली चोरी करके बैरकें बनाई जा रही हैं। मामला उजागर होने के बाद प्रतिसार निरीक्षक ने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर मामले से अवगत भी करा दिया है।
आम जनता की सुरक्षा में मुस्तैद पुलिस कर्मियों को रहने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ न सिर्फ थानों पर, बल्कि पुलिस लाइंस में आवास बनवा रहे हैं। जिले के पुलिस लाइंस में चार मंजिल की एक महिला बैरक सवा करोड़ की लागत से बनवाई जा रही है।
महिला बैरक बनाने का कार्य उत्तर प्रदेश पुलिस आवास निगम कर रहा है। करीब आठ करोड़ की लागत से 10 मंजिल की पुुरुष बैरक उत्तर प्रदेश पुलिस आवास निगम, जबकि करीब 12 करोड़ की लागत से 12 मंजिल की पुरुष का निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग करा रहा है।
बैरकों का निर्माण कार्य शुरू कराने से पहले ठेकेदारों ने कामर्शियल बिजली कनेक्शन नहीं लिया। पुलिस लाइंस की चोरी की बिजली से काम चलाया जा रहा है। मौरंग-सीमेंट की गुणवत्ता ठीक नहीं है। इस मामले में कई बार आपत्ति जताई गई, लेकिन ठेकेदारों ने ध्यान नहीं दिया। अब इस मामले में एसपी को लिखापढ़ी की गई है।
आपत्ति पर हटवाई गई घटिया सरिया
बैरक बनाने के लिए घटिया सरिया लगा दी गई। इस बात की जानकारी पुलिस लाइंस के अफसरों को हुई तो घटिया सामग्री को हटाकर नई सरिया मंगवाकर लगवाई गई। बावजूद इसके ठेकेदारों की मनमानी बंद नहीं हुई और सीएम के प्राथमिकता वाले कार्य पर भ्रष्टाचार का रंग लगाया जा रहा है।
अब तक बैरकों का निर्माण कार्य पूरा हो जाना चाहिए था। मनमाने ढंग से हो रहे कार्य की वजह से नहीं लगता है कि जल्द इन बैरकों का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। निर्माण कार्य कराने वाले ठेकेदार और अधिकारी फोन तक नहीं उठाते।
आपत्ति जताने पर लखनऊ से आ जाता फोन
चूंकि पुलिस लाइंस में बैरक बनवाने का काम उत्तर प्रदेश पुलिस आवास निगम को मिला है। इसलिए पुलिस लाइंस में तैनात अधिकारी मनमाने कार्य पर अंगुली भी नहीं उठा पा रहे हैं।
बताते हैं कि यहां के अधिकारी या फिर स्टाफ मनमाने कार्य पर अंगुली उठाता है या फिर आपत्ति करता है तो ठेकेदार इस मामले को लखनऊ में बैठे उत्तर प्रदेश पुलिस आवास निगम के अफसरों को दे देते हैं। वहां के अफसरों का फोन आने पर यहां का स्टाफ चाहकर भी कुछ नहीं कर पाता। ठेकेदारों की दबंगई का आलम ये है कि मौरंग-गिट्टी तक वह अपने मनमाने स्थान पर रखवाते हैं। यहां का स्टाफ इसका तक विरोध नहीं कर पा रहा है।
पुलिस लाइंस में एक महिला और दो पुरुष बैरक बनवाई जा रही है। निर्माण कार्य के लिए न तो कामर्शियल बिजली कनेक्शन लिया गया है और न ही गुणवत्ता का ख्याल रखा जा रहा है। इस मामले से एसपी को अवगत करा दिया गया है।
बृजेंद्र सिंह, प्रतिसार निरीक्षक, पुलिस लाइंस
पुलिस लाइंस में यदि बैरकों का निर्माण किया जा रहा है तो कामर्शियल बिजली कनेक्शन लिया जाना चाहिए था। वैसे उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। टीम भेजकर इसकी जांच कराई जाएगी। जांच सही मिली तो आवश्यक कार्रवाई कराई जाएगी।
वाईएन राम, अधीक्षण अभियंता, पावर कॉर्पोरेशन
इनसेट
पुलिस लाइंस में बनवाए जा रहे बैरकों में कामर्शियल बिजली कनेक्शन लिया गया है या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है। यह काम लोक निर्माण विभाग और उत्तर प्रदेश पुलिस आवास निगम करा रहा है, इसलिए यह जिम्मेदारी दोनों विभागों के अफसरों की है। फिलहाल बैरकों के निर्माण में मानक का प्रयोग करने के लिए कहा गया है। प्रतिसार निरीक्षक से रिपोर्ट भी मंगाई गई है। काम गड़बड़ी मिली तो लिखापढ़ी की जाएगी।
श्लोक कुमार, एसपी