हरचंदपुर। आस्तीक देव मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए रविवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सई नदी में स्नान करके लोगों ने मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद बाबा आस्तीक देव से मनौती मांगी। यह सिलसिला सुबह से शुरू होकर देर शाम तक चलता रहा। इस दौरान पुलिस प्रशासन सतर्क रहा। करीब दो लाख श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की।
लखनऊ-इलाहाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित गंगागंज कस्बे से लगभग चार किमी दूर दक्षिण में लालूपुर खास गांव के बाबा आस्तीक देव का मंदिर है। यहां सुबह से ही लोगों का तांता लगा रहा। नागपंचमी के एक दिन पहले यहां पर पूजा पाठ के लिए भक्त पहुंचते हैं। मध्यरात्रि के बाद पुजारी अमित तिवारी, हरिहर द्विवेदी ने पूरे विधि-विधान से हवन-पूजन किया। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर का कपाट खोल दिए गए।
तड़के चार बजे से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया। सई नदी के दूसरे छोर पर बसे गांवों के लोग नाव से पूजा करने पहुंचे। मंदिर के किनारे बह रही सई नदी में लोगों ने स्नान किया। इसके बाद कदंब की बनी खमिया चढ़ाकर पूजा-अर्चना की। रायबरेली के अलावा लखनऊ, बाराबंकी, उन्नाव, फतेहपुर, प्रतापगढ़ के भक्तों ने मंदिर में पहुंचकर पूजा अर्चना की। इस दौरान लगे मेले में लोगों ने खरीदारी की।
विकास विभाग की ओर से एडीओ पंचायत हरचंदपुर अरविंद सिंह, ग्राम प्रधान सर्वेश चौधरी और ग्राम विकास अधिकारी प्रिया गौतम ने श्रद्धालुओं की सुविधा और मेले की व्यवस्थाओं को लेकर ग्राम पंचायत स्तर पर इंतजाम किए। सुरक्षा के मद्देनजर एएसपी आलोक सिंह, सीओ महराजगंज प्रदीप कुमार, नायब तहसीलदार रामाशंकर मिश्रा मौजूद रहे।
सीओ महराजगंज प्रदीप कुमार ने बताया कि मेला सकुशल निपट गया है। करीब दो लाख भक्तों ने मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद मेले में भाग लिया। इस मौके पर मेला कमेटी के प्रबंधक प्रदीप श्रीवास्तव, अध्यक्ष सुरेंद्र श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष अमरेश श्रीवास्तव और सदस्य आशीष चौधरी सक्रिय रहे।
मंदिर की है पौराणिक मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार राजा परीक्षित की तक्षक नाग के काटने से मृत्यु के बाद उनके पुत्र राजा जनमेजय ने सर्पों के विनाश के लिए यज्ञ कराया था। ऋषि आस्तिक ने अपनी मंत्र शक्ति और बुद्धिमत्ता से यज्ञ को रुकवाकर सर्प प्रजाति की रक्षा की थी। इसी मान्यता के कारण उन्हें सर्पों का रक्षक और स्वामी माना जाता है। आस्था के कारण वर्षभर श्रद्धालुओं का मंदिर में आना-जाना लगा रहता है। सावन और नागपंचमी के अवसर पर श्रद्धालु विशेष रूप से पूजा-अर्चना करते हैं।
हरचंदपुर क्षेत्र के लालूपुर गांव स्थित आस्तिक स्वामी मंदिर परिसर में लगे मेला में सामान खरीदते