रायबरेली। ऊंचाहार देहात ग्राम पंचायत में विकास कार्यों की जांच में 6.88 लाख रुपये के गड़बड़झाले की पुष्टि हुई है। जांच में पता चला कि इंटरलॉकिंग, खड़ंजा, ह्यूम पाइप खरीद, हैंडपंप मरम्मत में मनमानी की गई है। डीएम सरनीत कौर ब्रोका ने प्रधान से प्रशासक का अधिकार छीन लिया। ऊंचाहार के एडीओ पंचायत को नया प्रशासक नियुक्त किया गया। अभिलेख न मिलने पर ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ)के खिलाफ एफआईआर के साथ ही वसूली के आदेश दिए गए हैं।
उत्तर प्रदेश विधान सभा की याचिका समिति के निर्देशों के तहत ऊंचाहार देहात में कराए गए विकास कार्यों की अंतिम जांच के लिए कमेटी गठित की गई थी। 104 कार्यों से संबंधित पत्रावलियां उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण इन कार्यों की जांच नहीं हो सकी। उपलब्ध अभिलेखों व स्थलीय सत्यापन में विभिन्न इंटरलॉकिंग व खड़ंजा निर्माण कार्यों में 1,99,532 रुपये की मनमानी की पुष्टि हुई। इसके अलावा ह्यूम पाइप स्थापना, हैंडपंपों के रीबोर, प्लेटफार्म निर्माण, स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत में भी 4,88,679 रुपये के दुरुपयोग की पुष्टि हुई।
अंतिम जांच में तत्कालीन ग्राम प्रधान/प्रशासक धनराज यादव व ग्राम विकास अधिकारी रुद्र प्रताप सिंह को वित्तीय अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार पाया गया। जांच में यह भी पाया गया कि राज्य वित्त आयोग व 15वें वित्त आयोग से संबंधित कार्यों के अभिलेख समय से उपलब्ध नहीं कराए गए। संबंधित सचिव के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है।
अंतिम जांच में 6,88,211 की वित्तीय अनियमितता मिलने के बाद तत्कालीन प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी से आधी-आधी धनराशि की वसूली के आदेश दिए गए हैं। डीएम सरनीत कौर ब्रोका ने बताया कि ऊंचाहार देहात के प्रशासक को हटा दिया गया है। दोषी ग्राम विकास अधिकारी पर एफआईआर कराई गई है।