लालगंज (रायबरेली)। नस्ली हिंसा के बाद मचे घमासान से इराक में काम करने वाला कोई विदेशी खुद को सुरक्षित नहीं महसूस कर रहा है, जितनी जल्दी हो सके वह स्वदेश लौटना को छटपटा रहा है। लालगंज इलाके के दो लोग भी कुर्दिस्तान के इरविल नामक शहर में फंसे हुए हैं। उनके साथ काम कर रहे सभी 151 भारतीय वतन वापसी के लिए परेशान हैं। इनमें पांच उत्तर प्रदेश के हैं। इलाके के लोगों में से ब्रजेश कुुमार ने व्हाट्स अप के जरिए सोमवार को ‘अमर उजाला’ से संपर्क साधा और अपनी पीड़ा बयान की।
लालगंज कोतवाली क्षेत्र के पूरे जमा मजरे बहाई गांव निवासी ब्रजेश सिंह व सरेनी थाना क्षेत्र के पूरे रघुनाथ सिंह गांव निवासी राजकिशोर वहां अरविलको कांस्ट्रक्शन कंपनी में काम करने के लिए पांच महीने पहले अलसुजीत इंटरनेशनल रिक्रूटमेंट कंपनी द्वारा ले जाए गए थे। प्रदेश के तीन अन्य लोगों में देवरिया के नित्यानंद यादव, सोनू यादव व गोरखपुर के रामप्रताप यादव भी शामिल हैं। इनके साथ पंजाब के 33, राजस्थान के 12 व पश्चिम बंगाल के नौ लोग भी वतन वापसी के लिए छटपटा रहे हैं। ब्रजेश कुमार और राजकिशोर ने बताया कि उन्हें वापस भेजने के लिए उनकी कंपनी प्रत्येक व्यक्ति से 1100 अमेरिकन डॉलर की मांग कर रही है और इस मुश्किल दौर में उनके वेतन में भी मनमानी कटौती कर रही है।
उन्होंने अन्य प्रांतों के अपने साथियों से बात कराई तो सभी ने यही कहा वे वहां बहुत डरे हुए हैं और परेशान हैं। वे सब भारत सरकार से वतन वापसी में मदद की गुहार कर रहे हैं। उन्हें हर क्षण यह डर बना हुआ है कि किस क्षण उनका शहर हिंसा की चपेट में आ जाए। ब्रजेश ने बताया कि खाना और पानी का संकट तो नहीं है लेकिन तेजी बढ़ती जा रही हिंसा को लेकर उनका भविष्य पूरी तरह से संकटमय बना हुआ है। उन्हें वतन वापसी के लिए तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की उम्मीद है।