रायबरेली। शासन का डंडा पड़ते ही 30 फार्मासिस्ट ने मेडिकल स्टोरों से अपना प्रमाणपत्र वापस लेकर इस्तीफा दे दिया। फार्मासिस्टों के इस्तीफे के साथ ही दवा की दुकानें स्वत: सस्पेंड हो गईं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन इन दुकानों के लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया में जुट गया है। दुकानदारों को मोहलत दी गई है कि फार्मासिस्ट का प्रमाणपत्र पेश करें। इस कार्रवाई से दवा दुकानदारों में हड़कंप मच गया है। मेडिकल स्टोर संचालक किसी तरह लाइसेंस को बचाने के प्रयास में जुटे हैं। विभाग भी दुकान संचालकों को छूट देने में जुटा है। शासन स्तर से कराई गई पड़ताल में पकड़ में आया कि एक-एक फार्मासिस्ट 10 से 20 मेडिकल स्टोरों में अपना प्रमाणपत्र लगाए हुए हैं, जबकि एक फार्मासिस्ट का प्रमाणपत्र एक ही मेडिकल स्टोर पर लगना चाहिए और फार्मासिस्ट को उस दुकान पर बैठना भी चाहिए। हालांकि ये आदेश विभाग ने पहले ही जारी कर दिया था, लेकिन इसका अनुपालन अब कराया जा रहा है। आदेश आते ही जिला प्रशासन ने दवा की दुकानों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। एक-एक करके दवा की दुकानों व फार्मासिस्टों को नोटिस जारी करने का काम शुरू कर दिया गया। विभाग के दबाव के बाद हरचंदपुर, लालगंज, सतांव, बछरावां, महराजगंज सहित कई कस्बोें की करीब 30 दुकानों के फार्मासिस्टों ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन को अपना इस्तीफा साैंप दिया है। अन्य दुकानों के फार्मासिस्ट भी इस्तीफा दे रहे हैं। एक साथ 30 से अधिक दुकानों के फार्मासिस्टों का इस्तीफा आने के बाद मेडिकल स्टोेर संचालकों में हड़कंप मच गया है। नियमानुसार फार्मासिस्टों के इस्तीफे के साथ ही दुकानों के लाइसेंस भी सस्पेंड हो गए। इस्तीफे आते ही विभाग ने मेडिकल स्टोर संचालकों को एक मोहलत दी है। नोटिस देकर चेताया गया है कि एक सप्ताह के अंदर फार्मासिस्ट का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करें। ऐेसा न करने पर दुकानों के लाइसेंस को निरस्त कर दिया जाएगा।