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नए कलर लाइट सिग्नल खड़े, अब बती जलने का इंतजार

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रायबरेली। लखनऊ-वाराणसी रेल मार्ग के विद्युतीकरण में बाधा बने पुराने सिग्नल की जगह पर नए सिग्नल खड़े कर दिए गए हैं। इन्हें केबिन से जोड़ भी दिया गया है।
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बस इन सिग्नल में बत्ती जलने का इंतजार है। अब लोको पायलट को पुराने टाइप के सिग्नल पर अप-डाउन नहीं देखना होगा, बल्कि हरी-लाल बत्ती जलते ही गाड़ी रोकना और आगे बढ़ाना होगा।


जैसे ही 19 मार्च को ट्रैफिक ब्लाक खत्म हो जाएगा, नए सिग्नल पर रेलगाड़ियों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। फिलहाल सीआरएस की अनुमति के बगैर इलेक्ट्रिक इंजन के साथ अभी ट्रेनें फर्राटा नहीं भर सकेंगी।
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लखनऊ-वाराणसी वाया रायबरेली रेल लाइन का विद्युतीकरण कार्य अंतिम चरण में चल रहा है, जिसके लिए रायबरेली यार्ड में लगे 44 पुराने सिग्नल बदले जा रहे हैं।


स्टेशन के पश्चिमी केबिन पर लगे सभी पुराने सिग्नल की जगह नए कलर लाइट सिग्नल खड़े कर दिए गए हैं। इसी तरह पूर्वी केबिन की तरफ लगे भी सिग्नल बदले जा रहे हैं।


इसके अलावा स्टेशन के आसपास लगे सभी पुराने सिग्नल बदल दिए जाएंगे। हालांकि इस कार्य के लिए ट्रैफिक ब्लॉक लिया गया है और कई ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं, जिससे यात्रियों को काफी दुश्वारी हो रही है।


रेल विकास निगम लिमिटेड के प्रबंधक जगन्नाथ मिश्र ने बताया कि सिग्नलों को केबिन से कनेक्ट करने के लिए वायरिंग पूरी कर ली गई है। लीवर को टेस्ट कर लिया गया है।


नान इंटरलॉकिंग की अनुमति 19 मार्च तक के लिए मिली है, इसलिए समय से पूरा काम कर लिया जाएगा तो श्रीराज नगर से गौरीगंज तक विद्युतीकृत रेल लाइन ट्रायल के लिए तैयार हो जाएगी। इसके बाद ट्रायल की अनुमति मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त से मांगी जाएगी।
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