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बोर्ड परीक्षा शुरू, वायस रेकार्डर मिला भारीपन, दी गई चेतावनी

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रायबरेली। माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटर की परीक्षाएं गुरुवार को शुरू हो गईं। जिले में 114 परीक्षा केंद्र बने हैं, लेकिन वैकल्पिक विषयों की परीक्षा होने के कारण पहली पाली में सिर्फ पांच तो दूसरी पाली में 95 केंद्रों पर परीक्षा कराई गई।
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महज तीन सचल दस्तों ने ही छापेमारी की। लेकिन कहीं कोई नकलची ढूंढे नहीं मिला। निरीक्षण के दौरान सीसीटीवी और वायस रिकार्डर को परखा गया तो इसमें तकनीकी खामियां मिलीं, जिस पर केंद्र व्यवस्थापकों को चेतावनी देते हुए खामी दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए।


पहली पाली में सुबह 8 से 11.15 बजे तक हाईस्कूल की संगीत गायन, इंटर की काष्ठ शिल्प, ग्रंथ शिल्प, सिलाई और दूसरी पाली में दोपहर 2 से सायं 5.15 बजे तक इंटर की मनोविज्ञान, शिक्षा शास्त्र, तर्कशास्त्र की परीक्षा कराई गई। पहली पाली में सिर्फ पांच सेंटरों जीजीआईसी बछरावां, जीजीआईसी रायबरेली, जीजीआईसी महराजगंज, सर्वोदय विद्यापीठ सलोन और वीणा पाणि कॉलेज में परीक्षा हुई।
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इसमें 85 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, जिसमें चार ने परीक्षा छोड़ दी। पहली पाली में वित्त एवं लेखाधिकारी के नेतृत्व वाला सचल दस्ता ही भ्रमण पर निकला। दूसरी पाली में 95 सेंटरों में परीक्षा कराई गई, जिसमें 5250 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। हालांकि इस पाली की अनुपस्थिति जुटाई नहीं जा सकी है।


दूसरी पाली में डीआईओएस डॉ. चंद्रशेखर मालवीय, वित्त एवं लेखाधिकारी विजय शंकर तिवारी, प्रधानाचार्य रजनीश तिवारी के नेतृत्व वाले सचल दस्तों ने डलमऊ, लालगंज और सलोन तहसील क्षेत्रों के परीक्षा केंद्रों में छापेमारी की।


डीआईओएस ने बताया कि निरीक्षण के दौरान कुछ परीक्षा केंद्रों में वायस रिकॉर्डर की आवाज में भारीपन पाया गया, जिससे आवाज स्पष्ट तौर पर नहीं सुनाई दी। इस पर इन सेंटर के केंद्र व्यवस्थापकों को चेतावनी देते हुए कहा गया है कि तत्काल तकनीकी खराबी ठीक करा लें। डीआईओएस ने हरदासपुर और देवानंदपुर स्थित परीक्षा केंद्रों में छापेमारी कर परीक्षा का जायजा लिया।


परीक्षा का बहिष्कार करने की धमकी
रायबरेली। माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा के प्रदेश अध्यक्ष एवं शिक्षक विधायक उमेश द्विवेदी ने बोर्ड परीक्षा का बहिष्कार किए जाने की धमकी दी है।


उन्होंने गुरुवार को जारी बयान में बताया कि यूपी के बजट में प्रदेश सरकार ने वित्तविहीन शिक्षकों की उपेक्षा की है। इससे प्रदेश के लाखों वित्तविहीन शिक्षकों में आक्रोश है।


यदि 11 फरवरी तक वित्तविहीन शिक्षकों के प्रतिनिधियों से सकारात्मक वार्ता कर मानदेय और सेवा नियमावली के संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है तो 12 फरवरी से बोर्ड परीक्षा का बहिष्कार किया जाएगा।


उधर, माध्यमिक शिक्षा विभाग बोर्ड परीक्षा के दौरान शिक्षकों की कमी न होने पाए, इसके लिए जुगाड़ कर रहा है। साथ ही जिले स्तर पर वित्तविहीन विद्यालयों की बैठक बुलाए जाने की रूपरेखा भी बनाई जा रही है, ताकि वित्तविहीन शिक्षकों की बोर्ड परीक्षा में उपस्थिति बढ़ाई जा सके।
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