रायबरेली। जिले के परिषदीय स्कूलों के हेडमास्टर बच्चों को पका-पकाया भोजन (एमडीएम) परोसने के नाम पर दुकानदारों के बकाएदार हो गए हैं।
करीब 3.32 करोड़ रुपये का सामान बाजार से उधारी में खरीदकर एमडीएम बनवा दिया, लेकिन शासन से पिछले चार माह से फूट कौड़ी न मिलने पर अब दुकानदार तगादा करने में जुट गए हैं। उधारी भी बंद कर दी है।
जिले के 2500 से अधिक परिषदीय स्कूलों में बच्चों को रोजाना मेन्यू के हिसाब से एमडीएम उपलब्ध कराया जा रहा है। कनवर्जन कास्ट पिछले जुलाई से न मिलने पर आधे से अधिक प्रधानों ने एमडीएम बनवाने की जिम्मेदारी हेडमास्टरों को सौंप दी है।
शासन ने भी आदेश दिए हैं कि किसी भी स्कूलों मेें एमडीएम बंद पाया गया तो इसके लिए हेडमास्टर दोषी होंगे। पिछले चार महीने से बजट न मिलने के बाद अब हेडमास्टरों के सामने बड़ी समस्या है।
करीब 3.32 करोड़ की सामान उधार लेकर एमडीएम तो बनवा दिया अब दुकानदारों ने समान देने मना करने के साथ ही उधारी देने से इनकार भी कर दिया है।