दुकानदार मांग रहे उधारी, दूधिये का भी दूध देने से इंकार
रायबरेली। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका स्कूलों की छात्राओं के भोजन की व्यवस्था के लिए मिलने वाला बजट तीन महीने से फंसा है। ऐसे में स्कूलों में दूधिये दूध देने से इंकार कर रहे हैं तो दुकानदार भी उधारी का भुगतान मांग रहे हैं। वार्डनों के पास गैस सिलेंडरों की व्यवस्था करने की समस्या आ गई है। सब्जी व अन्य सामान की खरीदारी भी नहीं हो पा रही है। राज्य परियोजनाओं से मेंटीनेंस मद में तीन महीने से फूटी कौड़ी उपलब्ध नहीं कराई है। करीब 15 लाख रुपये मिले तो उधारी चुकायी जाए।
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका स्कूलों में छात्राओं को पढ़ाई के साथ ही भोजन व अन्य सारी सुविधाएं मुहैया कराई जाती है। जिले में 16 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका स्कूल संचालित हैं। इन स्कूलों में करीब 1500 छात्राएं अध्ययनरत हैं। मेंटीनेंस मद में स्कूलों में छात्राओं के लिए दूध, गैस, सब्जी, फल व अन्य सामग्री की खरीदारी के लिए बजट दिया जाता है। कुछ बजट पहले और कुछ बजट समायोजन के बाद महीने के अंत मेें वार्डनों को उपलब्ध कराया जाता है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि तीन महीने से कस्तूरबा स्कूलों में मेंटीनेंस मद में बजट नहीं मिला है। ऐसे में छात्राओं के भोजन के लिए व्यवस्था करने में वार्डनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह है कि उधारी दे चुके दुकानदार भुगतान मांग रहे हैं। दूधिये भी दूध देने से मना कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
परियोजना से बजट नहीं मिल पा रहा है। शासन ने बजट स्वीकृत किया है। उम्मीद है कि इसी महीने बजट मिल जाएगा, जिसके बाद स्कूलों को उपलब्ध कराया जाएगा। वार्डन उधार की सामग्री लेकर काम चला रही हैं। बजट आते ही उधारी का भुगतान हो जाएगा।-संजय कुमार शुक्ला, बीएसए