एक साल बाद भी 7780 लोगों को छत की दरकार
रायबरेली। जिले में गरीबों को छत की मंशा तार-तार हो रही है। शिकायतों और जांच में बरती जा रही लापरवाही के चक्कर में एक साल बाद भी सात हजार से अधिक लोगों को प्रधानमंत्री आवास की छत के लिए दूसरी किस्त नसीब नहीं हुई है।
वर्ष 2016-17 मेें जिले में 16, 454 पात्रोें को प्रधानमंत्री आवास के लिए चुना गया। इसमें 16,282 को पहली किस्त देकर आवास का काम शुरू करने का आदेश दिया गया। पहली किस्त मिलने के साथ ही शिकायतों का सिलसिला शुरू हुआ और तमाम शिकायतें आने के बाद जांच के चक्कर में गरीबों के आवास फंस गए। जांच और विवादों के चक्कर में 12,416 लोगों को ही दूसरी किस्त दी गई। तीन हजार 866 लोगों को दूसरी किस्त नहीं दी गई।
वर्ष 2017-18 में 5,218 लक्ष्य के सापेक्ष 4,515 गरीबों को पहली किस्त दी गई। इसमें अब तक मात्र 601 गरीबों को ही दूसरी किस्त मिल सकी है। तीन हजार 914 लोगों को आज भी दूसरी किस्त का इंतजार है। विभाग द्वारा गरीबों को छत मुहैया कराने में बरती जा रही लापरवाही के कारण गरीबों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। आवास के लाभार्थी दूसरी किस्त के लिए ब्लॉकों के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
सुस्ती पर आयुक्त नाखुश, एक माह की मोहलत
जिले में प्रधानमंत्री आवास देने में बरती जा रही लापरवाही पर आयुक्त अनिल गर्ग नाराज हैं। उन्होंने मामले में आदेश जारी कर जिले के अधिकारियों को एक महीने की मोहलत दी है। 31 नवंबर तक लक्ष्य के सापेक्ष आपूर्ति न किए जाने पर चरित्र पंजिका के मूल्यांकन में विचार करने की चेतावनी तक दी है। आयुक्त का पत्र आने के बाद डीआरडीए में हड़कंप मच गया है।
प्रधानमंत्री आवासों की 107 शिकायतें लंबित
विभिन्न स्तरों पर जांच के लिए हुई शिकायतों में प्रधानमंत्री आवासों से संबंधित 107 शिकायतें अब भी लंबित हैं। समय से शिकायतों का निपटारा न हो पाने के कारण गरीबों को समय से आवास की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इसमें मुख्यमंत्री स्तर की 30 शिकायतों का निपटारा अब तक नहीं हो सका है। इसके अलावा डीएम स्तर की 12 और अन्य स्तर पर हुईं 56 शिकायतों का निपटारा अब तक विभाग नहीं कर पाया है।
लक्ष्य के सापेक्ष पात्र गरीबों को प्रधानमंत्री आवास दिए जा रहे हैं। शिकायतें मिलने पर उनकी जांच कराकर योजना का लाभ दिया जा रहा है। जिन अपात्रों को पहली किस्त दी गई है। जांच के बाद उनसे किस्त वापस ली जा रही है।-इंद्रसेन सिंह, पीडी, डीआरडीए