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दांव पर रहेगी सोनिया और दिनेश की प्रतिष्ठा

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दांव पर रहेगी सोनिया और दिनेश की प्रतिष्ठा
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रायबरेली। रायबरेली संसदीय सीट का लोकसभा चुनाव इस बार कांग्रेस और भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बना है। कहना गलत न होगा कि कांग्रेस प्रत्याशी सोनिया गांधी और भाजपा प्रत्याशी दिनेश प्रताप सिंह की साख दांव पर लगी है।

गांधी परिवार के अभेद किले को ढहाने के लिए इस बार भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां जनसभा को संबोधित कर चुके हैं।
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वहीं अपने परंपरागत सीट बचाने के लिए कांग्रेस भी पीछे नहीं रही। पूरा गांधी परिवार यहां वोट मांगता नजर आया। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी 2004 से लगातार रायबरेली संसदीय सीट से सांसद हैं। वह पांचवीं बार चुनाव मैदान में हैं।

यह सीट गांधी परिवार के लिए परंपरागत रही है। गांधी परिवार से जब-जब कोई प्रत्याशी बनकर मैदान में उतरा तो जनता ने उन्हें सिर आंखों पर बैठाया। भाजपा ने कभी कांग्रेस में रहे दिनेश प्रताप सिंह को चुनाव मैदान में उतारा।

गांधी परिवार के अभेद किले को ढहाने के लिए भाजपा हाईकमान शुरुआती दौर से मिशन में जुटा रहा। यही वजह रही कि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेल कोच फैक्टरी परिसर में जनसभा करके चुनावी शंखनाद किया।

सीएम योगी आदित्यनाथ के अलावा केंद्र और राज्य के कई मंत्रियों ने यहां आकर गांधी परिवार में कमल खिलाने की पूरी जोर आजमाइश की। गांधी परिवार भी अपनी परंपरागत सीट बचाने के लिए कम मेहनत नहीं की।

सांसद सोनिया गांधी के अलावा उनके बेटे राहुल गांधी, बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा यहां आकर जनता के बीच जाकर वोट मांगा। ऐसे में यह चुनाव कांग्रेस और भाजपा के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। दोनों दलों के प्रत्याशियों की साख इस चुनाव में लगी है।

अब देखना ये है कि यहां की जनता किसको सिर आंखों पर बैठाकर चुनाव में जीत दिलाकर सिकंदर बनाती है। चुनावी लिहाज से देखे तो इस बार वोटर खामोश है और उसे सोमवार को अपना संसद चुनने के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग करना है।
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यहां पर कब कौन चुनाव जीता
वर्ष विजेता प्रत्याशी पार्टी
1952 फिरोज गांधी कांग्रेस
1957 फिरोज गांधी कांग्रेस
1961 राजेंद्र प्रताप सिंह कांग्रेस
1962 राजा दिनेश सिंह कांग्रेस
1967 इंदिरा गांधी कांग्रेस
1971 इंदिरा गांधी कांग्रेस
1977 राजनारायण जनता पार्टी
1980 अरुण नेहरू कांग्रेस
1984 अरुण नेहरू कांग्रेस
1989 शीला कौल कांग्रेस
1991 शीला कौल कांग्रेस
1996 अशोक सिंह भाजपा
1998 अशोक सिंह भाजपा
1999 सतीश शर्मा कांग्रेस
2004 सोनिया गांधी कांग्रेस
2006 सोनिया गांधी कांग्रेस
2009 सोनिया गांधी कांग्रेस
2014 सोनिया गांधी कांग्रेस

हारजीत के अंतर को कम करेंगे निर्दलीय
दो प्रमुख दलों कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशियों को मिलाकर यहां पर कुल 15 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। छोटी पार्टी के प्रत्याशी और निर्दलीय उम्मीदवार भले ही चुनावी बाजी जीतने की क्षमता न रखते हों, लेकिन प्रमुख दलों के हारजीत के अंतर कम करने में जरूर अहम भूमिका निभाएंगे। देखना ये है कि छोटे दलों के प्रत्याशी और निर्दलीय उम्मीदवार कितने वोट काटने में सफल होते हैं।
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