धमाके के साथ दहल गए कई गांवों के लोग
ऊंचाहार (रायबरेली)। ऐसा लगा जैसे बादल फट गया है और वह गांव में गिरने वाला है। घर में बैठे या आराम कर रहे लोग बाहर आ गए और खेतों में काम कर रहे किसान-मजदूर गांव की तरफ भागे। कुछ गन्ने के खेत में दुबक गए। यह कहना है कि गांव की महिलाओं और पुरुषों का है। हादसे के बाद सहमे ग्रामीणों का कहना है कि काफी देर बाद पता चला कि बादल नहीं फटा, बल्कि एनटीपीसी का बॉयलर फट गया है। एनटीपीसी की यूनिट नंबर 6 में धमाका हुए 40 घंटे बीत गए हैं, लेकिन अभी तक बिकई समेत कई गांवों के ग्रामीण दहशत के माहौल में जीने को मजबूर हैं। आश्चर्य इस बात का है कि इन ग्रामीणों को कोई सांत्वना देने वाला भी नहीं है।
बिकई गांव के लाल का कहना है कि दोपहर बाद तेज खड़खड़ाहट की आवाज के साथ तेज धमाका हुआ। ऐसा लगा कि बादल फट गया और और वह गिरने वाला है। कुछ देर बाद पता चला कि एनटीपीसी का बॉयलर फट गया है। घटना से आसमान पर धुंध छाने के साथ हल्की राख फैल गई। राधेश्याम का कहना है कि घर वाले दहशत के माहौल में जीने को मजबूर हैं। धमाका होने से ना रात को सो पाए और ना ही दिन में चैन मिला। प्रदीप कुमार, पीतांबर, छेदीलाल, पवन कुमार, जानकी देवी. संपत्ति देवी, रूपा देवी का कहना है कि राख तो आए दिन उड़ती रहती है, लेकिन बॉयलर फटने की आवाज से घर ऐसे हिले जैसे गिर जाएंगे। इस तरह की घटना फिर ना हो जाए, इसको लेकर लोग भयभीत हैं। इसी तरह फरीदपुर के गांव के लाल बहादुर, विश्वजीत, मुन्नू सिंह व गोसाईं का पुरवा, अलीगंज, पुरवारा, बहेरवा, जरीफाबाद व पूरे भक्तिन के ग्रामीणों का कहना है कि एनटीपीसी में हुए धमाके ने परिवार की नींद उड़ा दी है। बुधवार की रात वह इस आशंका में सो नहीं पाए कि कहीं फिर कोई धमाका ना हो जाए। उनका कहना है कि एनटीपीसी के अधिकारी ग्रामीणों की समस्याओं पर ध्यान नहीं देते। यही वजह है कि उन लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।