अफसरों ने कहा-आधुनिक खेती करो, किसान बोले-सुविधाएं नहीं
- जिला पंचायत के सभागार में लगा निवेश व किसान मेला
- खाद, बीज और आधुनिक उपकरणों का किया गया प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
रायबरेली। जिला पंचायत के सभागार में बुधवार को आयोजित निवेश और किसान मेला में अधिकारियों के सामने किसानों की समस्याएं गूंजी। अफसरों ने आधुनिक खेेती कर ज्यादा उत्पादन का सबक दिया तो किसानों ने कहा कि सुविधाएं नहीं हैं तो कहां से उत्पादन बढ़ाया जाए। किसी ने पानी तो किसी ने बिजली और खराब नलकूपों का हवाला देकर अपनी समस्या उठाई। किसानों का कहना है कि नहरों में पानी नहीं है तो धान की बेड़न कैसे डाली जाए। नलकूप खराब हैं और बिजली मिलती नहीं है तो खेतों की छपाई कैसे की जाए। इस पर डीएम अभय सिंह, सीडीओ देवेंद्र पांडेय, जिला कृषि अधिकारी सतीश पांडेय ने कहा कि समस्याओं का हर हाल में निस्तारण किया जाएगा।
डीएम ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि गरीब हो या अमीर, सभी किसानों को समानता के साथ सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। इसके कृषि विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। सीडीओ ने कहा कि किसी को कोई दिक्कत है तो विभाग के साथ आला अधिकारियों को भी अपनी समस्याएं बताएं। उप कृषि निदेशक महेंद्र सिंह ने बताया कि किसानोें को अपना पंजीकरण कराना चाहिए। तभी सुविधाओं का लाभ लिया जा सकता है।मेले में सरेनी के किसानों ने कहा कि 2011 व 2012 में 45 हजार रुपये जमा करके नलकूप की बोरिंग कराई थी, लेकिन पावर कॉर्पोरेशन की ओर से आज तक उनको बिजली कनेक्शन नहीं दिए गए। इस समस्या को लेकर कई बार आवाज उठाई गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। यही नहीं योजनाएं तो बहुत बताई जाती हैं, लेकिन ब्लॉक मुख्यालय तक योजनाओं के बारे में जानकारी की जाती है तो बताया जाता है कि योजना खत्म हो गई, जिसको लाभ मिलना था, वह मिल गया।कृषि मेला का संचालन अतुल पांडेय ने किया।
इनसेट
पानी, खाद-बीज और बिजली मिले तो हो आधुनिक खेती
राही ब्लॉक के गांव बेलागुसीसी खलार के रहने वाले गंगाराम, सैदनपुर के रामबिलास, जरौला के बाबूलाल, मटिहा के राजेंद्र प्रसाद, गदियानी मजरे सरांयदामू के सहदेव और अमावां ब्लॉक के कचौंदा नानकारी निवासी शत्रोहन लाल अवस्थी ने कहा कि हर बार मेला लगाया जाता है। खेती के यंत्रों और खाद-बीज का प्रदर्शन होता है, लेकिन उनकी समस्याओं का निस्तारण नहीं किया जाता है। नहरों में पानी नहीं आता, बिजली मिलती नहीं। सरकारी नलकूप खराब पड़ें हैं। ऐसे में आधुनिक खेती का सपना साकार नहीं हो पा रहा है। किसानों का कहना है हर बार समस्या उठाई जाती है, लेकिन सुनने के बाद अफसर भूल जाते हैं। यदि सरकारी नलकूप या फिर नहरों में पानी आता भी तो दंबंगों के आगे छोटे किसानों को पानी नहीं मिल पाता। खाद-बीज भी पहले बड़े किसानों को दी जाती है।