रायबरेली। एम्स रायबरेली में ओपीडी का सोमवार को श्रीगणेश हो गया। यहां कई नामी गिरामी डॉक्टर लोगों का इलाज करने के लिए आ गए हैं। किसी ने अमेरिका में रिसर्च किया है तो किसी ने दिल्ली एम्स में काम करके जटिल रोगियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी हैं। कई डॉक्टरों ने जटिल ऑपरेशन करके रोगियों को ठीक किया है। एम्स में नाक-कान-गला, दंत रोग, हड्डी रोग, नेत्र रोग व मेडिसिन विभाग की सेवाएं शुरू हो गई हैं। कई और विशेषज्ञ सेवाएं भी जल्द ही शुरू होने वाली हैं, जिससे एक ही छत के नीचे लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर लाभ मिलेगा।
जीभ के कैंसर व नाक ट्यूमर का इलाज कर चुकीं डॉ. अनन्या
ये हैं नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ डॉ. अनन्या सोनी। झांसी की रहने वाली डॉ. अनन्या गोरखपुर से एमबीबीएस व कानपुर से पीजी करने के बाद एम्स दिल्ली में तीन साल स्वास्थ्य सेवाएं दे चुकी हैं। जीभ कैंसर, थाइराइड ट्यूमर, कान के बहरेपन व नाक ट्यूमर समेत 50 से अधिक गंभीर रोगियों का ऑपरेशन करके उन्हें ठीक कर चुकी हैं। अब वे एम्स में भी ईएनटी के जटिल रोगों से ग्रसित लोगाें को बेहतर लाभ देने का प्रयास करेंगी। पहले दिन उन्होंने 78 रोगियों का इलाज किया।
कृत्रिम लेंस लगाने में माहिर हैं डॉ. एसपी सिंह
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एसपी सिंह अमेठी जिले के गौरीगंज के रहने वाले हैं। मेडिकल कॉलेज लखनऊ से एमबीबीएस व कानपुर से एमएस करने के बाद पांच साल तक लखनऊ के कई बडे़ निजी अस्पतालों में काम किया। उनका कहना है कि आंखों के कृत्रिम लेंसों को लगाना काफी कांप्लीकेटेड काम होता है। हालांकि हजारों लोगों के नेत्रों का ऑपरेशन करके इलाज किया है। अब तक 45 से अधिक ऑपरेशन करके कृत्रिम लेंसों को लगाया है। पहले दिन 77 नेत्र रोगियों का इलाज किया।
अमेरिका से रिसर्च करके यहां आए डॉ. अंकित
एम्स के लैब इंचार्ज डॉ. अंकित गुप्ता ने वर्ष 2014 से 2017 तक अमेरिका में रहकर रिसर्च किया है। लखनऊ के ठाकुरगंज के रहने वाले डॉ. गुप्ता ने इससे पहले जवाहर लाल नेहरू कॉलेज से पीएचडी की। उनका कहना है कि यहां ब्लड की करीब 50 तरह की जांचे होंगी। ब्लड काउंट जांच भी की जाएगी। आने वाले समय में जांच ही नहीं, बल्कि रिसर्च भी होगा। अभी कम जांचें हो रही हैं, लेकिन जल्दी ही मशीनें हाईटेक होने के बाद जांचों की बेहतर सुविधा रोगियों को मिलने लगेगी। पहले दिन 20 रक्त के नमूनों की जांच की गई।
एम्स दिल्ली में मेडिसिन (एमडी) थे डॉ. प्रमोद
एम्स के मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रमोद कुमार अंबेडकरनगर जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने मेडिकल कॉलेज लखनऊ से एमबीबीएस करने के बाद एमडी की डिग्री ली है। वे तीन साल तक लखनऊ के निजी अस्पताल में काम कर चुके हैं। एम्स दिल्ली में मेडिसिन (एमडी) रह चुके हैं। सोमवार को 246 रोगियों की सेहत जांची।
डॉ. सुहास को दिल्ली के बाद यहां मिली जिम्मेदारी
ये हैं एम्स के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सुहास। मिर्जापुर के रहने वाले डॉ. सुहास ने मेडिकल कॉलेज लखनऊ से एमबीबीएस किया। दिल्ली के कई अस्पतालों में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। हड्डी के कई गंभीर रोगों को ठीक किया है। आर्थो की नई तकनीकी से ऑपरेशन करते हैं। पहले ही दिन उन्होंने 110 रोगियों का इलाज किया।
दांत के कई गंभीर रोगों को ठीक कर चुकीं डॉ. श्रुति
आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम की रहने वाली दंत रोग की डॉ. श्रुति सिंह ने कृष्णदेव राय कॉलेज बंगलुरू से एमबीबीएस के बाद एमडीएस की डिग्री ली। वे बंगलुरू के अलावा मल्टी फैमिली हॉस्पिटल विशाखापट्टनम में असिस्टेंट डॉक्टर के पद पर काम कर चुकी हैं। दांत के कई गंभीर रोगों को ठीक किया है। पहले दिन दांत के 34 रोगियों का इलाज किया।
बरेली के अस्पतालों में काम कर चुके डॉ. राहुल
एम्स के मेडिसिन विभाग के डॉ. राहुल मिश्रा जूनियर रेजिडेंट के पद पर काम करेंगे। जैदपुर फैजाबाद के मूल निवासी डॉ. राहुल ने रुहेलखंड बरेली से एमबीबीएस किया। इसके बाद बरेली के ही कई बडे़ अस्पतालों में रोगियों को स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर लाभ दे चुके हैं। उनके पास करीब पांच साल का अनुभव है। सोमवार को पहले दिन मेडिसिन विभाग में ही सबसे अधिक रोगी देखे गए।