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664 गांवों में ठप पड़े विकास कार्य

Thu, 28 Jul 2016 11:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली
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काम आधा-अधूरा - फोटो : amarujala
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केंद्र और प्रदेश सरकार ग्रामीण अंचलों में विकास के लिए तमाम प्रयास कर रहीं हैं, लेकिन अफसर उनकी मंशा पर पानी फेरने में जुटे हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नए वित्तीय वर्ष के चार माह बीतने वाले हैं। गांवों में विकास की नींव तो रखना दूर, प्रशासन के पास कार्ययोजना ही नहीं है। ऐसे में 664 गांवों में विकास थमा हुआ है।
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जिले में कुल 989 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें हर साल की तरह इस साल भी 14वें और राज्य वित्त आयोग से विकास कार्य होने हैं। खड़ंजा, जल निकासी के लिए नाली, पेयजल और मार्ग प्रकाश की सुविधाएं सुनिश्चित कराई जानी है। सभी ग्राम पंचायतों के खातों में कार्य की शुरूआत कराने के लिए एक-एक लाख रुपये भी पहुंच चुके हैं, लेकिन विकास का कहीं नामों निशान नहीं दिख रहा है।

धरातल पर विकास कार्यों का दिखना तो दूर रहा, अफसरों ने अब तक कार्ययोजना ही नहीं बनाई है। वित्तीय वर्ष 2016-17 के करीब चार माह बीतने वाले हैं, लेकिन महज 325 गांवों की कार्ययोजना ही बन सकी है। जबकि 664 गांवों की योजना बनना बाकी है।
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विभागीय जानकारों का कहना है कि कार्य योजना बनाने से लेकर उसे पास कराने तक सारे कार्य मैनुअल होते थे। विकास कार्यों को पारदर्शी बनाने के लिए अब सारी व्यवस्था ऑनलाइन कर दी गई है। कार्ययोजना बनाकर इन्हें विकास खंड स्तर पर ऑनलाइन फीड कराया जा रहा है।

इसकी जिम्मेदारी ग्राम पंचायत सचिव, ग्राम प्रधान और एडीओ पंचायत को दी गई है। व्यवस्था के हिसाब से काम करने में बरती जा रही लापरवाही गांवों के विकास में बाधक बन रही है। 14वें और राज्य वित्त आयोग से होने वाले कार्यों की ऑनलाइन फीडिंग पहली बार कराई जा रही है।

इसकी पहले से आधी अधूरी तैयारियों की वजह से भी गांवों में विकास कार्य शुरू नहीं हो सके हैं। कैसे योजना बनानी है और कैसे उनकी फीडिंग करानी है, इसकी ग्राम प्रधानों और ग्राम पंचायत सचिवों को जानकारी ही नहीं है। वहीं तमाम एडीओ पंचायत भी इससे अनजान हैं। आए दिन इन्हें जानकारी हासिल करने के लिए मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

डीपीआओ संजय यादव ने बताया कि 325 गांवों की कार्ययोजना बनकर तैयार हो गई है। उनकी ऑनलाइन फीडिंग भी कराई जा चुकी है। शेष बची कार्ययोजना की फीडिंग का काम तेजी से चल रहा है। जल्द ही यह भी पूरी कर ली जाएगी। ग्राम पंचायतों के खातों में धन भी है। योजना की फीडिंग होते ही कार्य शुरू करा दिए जाएंगे।
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