रायबरेली। बांदा राष्ट्रीय राजमार्ग पर लग रहे टोल टैक्स से बचने की चाह में मुसाफिरों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। वाहन संचालक गाड़ियों को हाईवे पर न लाकर डलमऊ की ओर से शहर में प्रवेश कर रहे हैं।
ट्रैफिक लोड बढ़ने से हादसे का खतरा बढ़ गया है। इससे न सिर्फ जाम लग रहा है, बल्कि पुलिस अफसरों को आवागमन को बेहतर बनाने में मशक्कत करनी पड़ रही है। इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
16 दिसंबर 2018 को मॉडर्न रेल कोच फैक्टरी, लालगंज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 558 करोड़ रुपये की लागत से बने राष्ट्रीय राजमार्ग का शुभारंभ किया था।
शुभारंभ के दो दिन बाद हाईवे पर टोल टैक्स वसूली भी शुरू हो गई। लेकिन टोल टैक्स से बचने के लिए कानपुर, बांदा, फतेहपुर से आने वाले भारी वाहन डलमऊ से मुंशीगंज से होते हुए शहर की तरफ प्रवेश कर रहे हैं, जबकि लखनऊ, सुल्तानपुर, फैजाबाद से कानपुर की तरफ जाने वाले भारी वाहन मुंशीगंज से डलमऊ होते हुए लालगंज और फिर कानपुर जा रहे हैं।
करीब 1500 भारी वाहनों के संचालन का रूट बदलने से समस्या आ रही है। डलमऊ से मुंशीगंज रूट पर वाहनों का दबाव बढ़ने से हादसे का खतरा बढ़ गया है। वहीं ट्रैफिक जाम की समस्या भी गहराती जा रही है।
भारी वाहनों के संचालन से मार्ग खस्ताहाल हो जाते हैं। इसलिए राजमार्ग के मुकाबले हाईवे अधिक बेहतर ढंग से बनाए जाते हैं। इसके लिए जिला प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।
अब्दुल बासिद, परियोजना निदेशक, एनएचएआई