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मुसीबत बना हमसफर का डैमेज एसी कोच

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रायबरेली। लालगंज आधुनिक रेल डिब्बा कारखाने से भले ही निर्मित किए गए कोच भेजकर वाहवाही बटोरी जा रही हो, लेकिन रास्ते में खामियां मिलने से दुश्वारी और बढ़ जाती हैं।
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कोच फैक्ट्री से निकला ‘हमसफर’ का एसी कोच डैमेज होने के कारण आगे नहीं जा सका, लेकिन रायबरेली रेलवे स्टेशन के लिए मुसीबत बन गया है।


चार दिन से इस कोच को कभी इधर तो कभी उधर किया जा रहा है। अभी इसे कोच फैक्ट्री वापस नहीं भेजा जा सका है। अलबत्ता इसके डैमेज होने की सूचना जरूर फैक्ट्री भेज दी गई है, लेकिन कोच को लेकर कोई जवाब अभी तक फैक्ट्री से नहीं आया है।


इस डिब्बे के कारण दूसरी ट्रेनों के आवागमन और शंटिंग के दौरान दिक्कत आ रही है। रविवार को हमसफर के एसी कोच को ठोकर-9 लाइन से हटाकर यार्ड में खड़ा करा दिया गया है।
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लालगंज स्थित मॉडर्न रेल कोच फैक्ट्री से 24 कोच वाली एक रैक भेजी गई थी, जो 25 सितंबर को रायबरेली स्टेशन पर आई थी।


इसमें दो कोच सामान्य थे और बाकी हमसफर के 22 एसी कोच आए थे। करीब 10 दिन बाद 3 अक्तूबर को एसी कोच हबीबगंज भेजे जाने थे, लेकिन इनमें एक कोच को बड़ी फॉल्ट होने के कारण रोक लिया गया था, जिसे कोच फैक्ट्री वापस भेजने के लिए रायबरेली रेलवे स्टेशन पर खड़ा रखा गया है।


इस कोच को तभी भेजा जा सकेगा, जब फैक्ट्री की तरफ से कोई रिस्पांस आएगा या फिर यहां से कोई इंजन नई रैक लेने फैक्ट्री जाएगा। इसीलिए पिछली 3 अक्तूबर से डैमेज एसी कोच यहां खड़ा है।


गिट्टी लदी एक वैगन को निकालने में आई दुश्वारी
हमसफर के डैमेज एसी कोच को ठोकर-9 लाइन पर खड़ा कराया गया था, जहां पहले से ही किसी दूसरे स्टेशन से आया गिट्टी लदा मालगाड़ी का एक वैगन खड़ा था।


हमसफर का एसी कोच खड़ा रहने से यह वैगन भी फंस गया था। रविवार को एक मालगाड़ी रूपामऊ होकर आगे जानी थी, जिससे जोड़कर यहां खड़े वैगन को रूपामऊ भेजना था, लेकिन आगे लगे हमसफर के डैमेज एसी कोच के चलते दिक्कत आई। पूरा दिन स्टेशन का स्टाफ पहले तो एसी कोच हटाने और फिर वैगन को निकालकर आगे भेजने में लगा रहा।


कोच फैक्ट्री में भेजने तक यहीं रखना पड़ेगा हमसफर
स्टेशन अधीक्षक राकेश कुमार का कहना है कि चार-पांच दिन से ठोकर-9 पर एसी कोच खड़ा था। यहां पहले से खड़े गिट्टी लदे वैगन को रूपामऊ भेजना था, जो कि बिना एसी कोच हटाए संभव नहीं था।


इसलिए एसी कोच को वहां से हटाकर यार्ड में खड़ा करा दिया गया और वैगन को मालगाड़ी से जोड़कर रूपामऊ भेजा गया। जब तक हमसफर के कोच को लेकर फैक्ट्री से कोई रिस्पांस नहीं आता है, तब तक इसे यहीं पर कहीं इधर तो कहीं उधर खड़ा रखना मजबूरी बना है।
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