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अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस पर खास

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अपनों के ही सितम से कराह रही आधी आबादी
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रायबरेली। एक बार फिर हम 25 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस मनाने जा रहे हैं, लेकिन इसके सार्थक परिणाम सामने आने को बाकी हैं। अपनों के ही सितम से आधी आबादी कराह रही है। कभी पतियों के नशा करने का विरोध करना पड़ा उसे महंगा पड़ जाता है तो कभी दहेज की खातिर उसका उत्पीड़न होता है। जिले में घरेलू हिंसा रोकने के लिए किए जा रहे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। हालात ये हैं कि जिले के इकलौते महिला थाने में हर माह 100 से ज्यादा घरेलू हिंसा के केस आते हैं। न्याय मांगने के नाम पर पीड़िताओं को ऐड़ियां घिसनी पड़ती है। घरेलू हिंसा के मामले आने पर पहले सुलह कराने की कोशिश होती है। पर बात नहीं बनने पर कार्रवाई की जाती है। इस दिवस को मनाने का मकसद तभी पूरा हो पाएगा, जब सिर्फ पुलिस ही नहीं, बल्कि समाज लोग इस दिशा में आगे आएंगे।

सबला ने दो हजार से ज्यादा महिलाओं को दिलाया हक
घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए सबला संस्था खेवनहार बनी है। शहर के इंदिरा नगर में सबला का दफ्तर है। वर्ष 1987 से सबला संस्था की ओर से घरेलू हिंसा के मामले निपटाए जा रहे हैं। तीन साल में सबला की ओर से 2,976 मामले निपटाकर महिलाओं को उनका हक दिलाया है। सबला संस्था की प्रभारी मीनू त्यागी कहती हैं कि कुल मिलाकर उनकी संस्था में 10 लोग कार्य करते हैं। पहले की अपेक्षा घरेलू हिंसा के मामले बढ़े हैं, जो चिंता का विषय हैं। यहां पर जो भी महिलाएं आती हैं, उसे न्याय दिलाने की कोशिश की जाती है। काउंसलर ज्योति श्रीवास्तव व दीपिका शुक्ला कहती हैं कि महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए सरकारी मदद ली जाती है। महिलाओं को उनका हक दिलाने की कोशिश की जा रही है।
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चुप न बैठें, अपनी शिकायत दर्ज कराएं
पुलिस क्षेत्राधिकारी डलमऊ शैलजा मिश्रा कहती हैं कि देखने में आ रहा है कि घरेलू हिंसा के मामले बढ़ रहे हैं, जो समाज के लिए ठीक नहीं है। कहती हैं कि महिलाएं जागरूक बने। हिंसा का शिकार होने पर चुपचाप न बैठें। थानों पर जाकर शिकायत दर्ज कराएं। अब तो कई फोरम भी चल रहे हैं। उनकी मदद भी लें। पुलिस क्षेत्राधिकारी तिलोई बीनू सिंह कहती हैं कि महिलाएं शिक्षित बने। अपने अधिकारों के बारे में जाने। ऐसा होने पर स्वयं घरेलू हिंसा के मामलोें में कमी आएगी। हिंसा का शिकार होने पर न्याय पाने के लिए आवाज जरूर उठाएं। चुप बैठकर सहन न करें। पुलिस उनकी मदद के लिए सदैव तत्पर हैं।

शिक्षित हो महिलाएं, अधिकारों की लड़ाई लड़ें
महिला थानेदार पुष्पा अवस्थी कहती हैं कि घरेलू हिंसा के मामले बढ़ रहे हैं। किसी न किसी बात को लेकर उनका उत्पीड़न किया जाता है, जो समाज के लिए उचित नहीं है। कहती हैं कि शिक्षित न होना, कानून के प्रति जानकारी न होना महिलाओं के लिए घरेलू हिंसा की वजह बन रही है। इसलिए जरूरी है कि महिलाएं शिक्षित बनें। कानून की जानकारी करें। अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ें। जीआरपी थाने में तैनात दरोगा कंचन सिंह कहती हैं कि पति शराब का नशा करते हैं। महिलाएं विरोध करती हैं तो उन्हें कोपभाजन होना पड़ता है। इससे निपटने का अच्छा तरीका है कि महिलाएं जागरूक हों। स्वयं इसके लिए एकजुट होकर लड़ाई लडे़ं। सिपाही सुधा वर्मा कहती हैं कि महिलाओं को घरेलू हिंसा का डटकर मुकाबला करना चाहिए। पीछे नहीं हटना चाहिए।
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घरेलू हिंसा के मामलों से निपटने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। थाने पर जो भी मामले पहुंचते हैं, उनकी रिपोर्ट दर्ज करके कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। घरेलू हिंसा के मामले में भी सुलह की भी कोशिश की जाती है, ताकि परिवार टूटने न पाए। बात न बनने पर कार्रवाई होती है। कई मामलों में कार्रवाई भी की गई है।- शिवहरि मीणा, एसपी

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