रायबरेली। कक्षा एक से आठ तक में पढ़ने वाले करीब 60 हजार बच्चों को अभी तक यूनीफाॅर्म, जूता-मोजा, बैग, स्टेशनरी आदि के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) का लाभ नहीं मिल सका है। नया शैक्षिक सत्र अप्रैल में शुरू हो गया था, लेकिन प्रथम चरण में 26 मई को सिर्फ 1.40 लाख बच्चे ही लाभान्वित किए जा सके हैं। अभी भी 60 हजार बच्चे वंचित हैं।
गर्मी की छुट्टियां खत्म होने के बाद स्कूल खुलेंगे तो नए बच्चों के प्रवेश होने से संख्या बढ़ती जाएगी। डीबीटी प्रक्रिया में ढिलाई की वजह से ही बच्चों को समय से लाभ नहीं मिल पा रहा है। कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को यूनीफाॅर्म, स्वेटर, जूता-मोजा, बैग, स्टेशनरी आदि के लिए 12-12 सौ रुपये की धनराशि डीबीटी के तहत दी जाती है।
वैसे तो डीबीटी की राशि नया सत्र शुरू होते ही मिल जानी चाहिए, ताकि बच्चे यूनिफाॅर्म में विद्यालय पहुंचे। इसके बावजूद जिले में किसी भी बच्चे को समय से लाभ नहीं मिल पाया। पहली अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र शुरू हुआ और 20 मई से विद्यालयों में ग्रीष्मावकाश हो गया। इस दौरान बच्चे पुरानी यूनिफाॅर्म में स्कूल पहुंचे या फिर बगैर ड्रेस से विद्यालय आए। डीबीटी के तहत धनराशि भेजने की शुरुआत 26 मई को हुई तो बच्चे लाभान्वित होना शुरू हुए।
प्रथम चरण में करीब 1.40 लाख बच्चे लाभान्वित हुए हैं। यानी कि डेढ़ महीने में सिर्फ इतने ही बच्चों की डीबीटी प्रक्रिया पूरी की जा सकी थी। अगर तेजी दिखाई जाती तो इससे ज्यादा बच्चों को लाभान्वित कराया जा सकता था। जिला समन्वयक (सामुदायिक/एमआईएस) अविलय सिंह ने बताया कि जिले में दो लाख से अधिक बच्चे हैं, जिनमें करीब 1.40 लाख बच्चों को लाभान्वित कराया जा चुका है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शिवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि जिन बच्चों को अभी लाभ नहीं मिल सका है, उनकी डीबीटी प्रक्रिया चल रही है। डीबीटी प्रक्रिया में कोई ढिलाई नहीं की गई। बाकी बच्चे भी जल्द लाभान्वित होंगे।