218 लेखपालों की भर्ती में फर्जीवाडे़ की आशंका
रायबरेली। सपा सरकार के दौरान 2015-16 में जिले में हुई 218 लेखपालों की भर्ती में फर्जीवाडे़ की आशंका है। आईजीआरएस पर हुई शिकायत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच के आदेश दिए हैं।
एडीएम (प्रशासन) और एसडीएम (राजस्व एवं आपदा विभाग) को जांच सौंपी गई है। आरोप है कि शासनादेश में आंशिक श्रवण ह्रास अभ्यर्थियों को चयन में प्राथमिकता देने के आदेश थे, लेकिन हाथ व पैर से निशक्त लोगों का भी मनमाने तरीके से चयन किया गया था। जांच के आदेश के बाद हड़कंप मच गया है।
2015 में जिले में लेखपाल के 222 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। मार्च 2016 में 218 लेखपालों का चयन किया गया था।
जनसूचना अधिकार के तहत मांगी गईं सूचना के बाद खुलासा हुआ कि श्रवण ह्रास के अलावा हाथ व पैर से दिव्यांग अभ्यर्थियों का चयन भी आननफानन में प्रमाणपत्र बनवाकर चयन कर दिया गया था।
लेखपाल भर्ती के लिए जारी शासनादेश साफ -साफ अक्षरों में लिखा है कि दिव्यागों में आंशिक श्रवण ह्रास (पीडी) को ही प्राथमिकता दी जाएगी।
इसके बाद भी जिले में सीएम अखिलेश सरकार के दौरान हुई लेखपाल भर्ती प्रकिया में इस शासनादेश को अधिकारियों ने अपने पैरों तले रौंद दिया।
हाथ व पैर से दिव्यागों को न सिर्फ भर्ती किया बल्कि उनके बने प्रमाणपत्रों को बैक डेट से इंट्री भी किया। जनसूचना अधिकार के तहत प्रशासन ने पांच दिव्यांगता प्रमाणपत्र दिए हैं जिसमें कोई हाथ तो कोई पैर से दिव्यांग है।
मामले की शिकायत आईजीआरएस पर होने के बाद मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए हैं। एडीएम प्रशासन व एसडीएम सदर को जांच सौपी गई है। जांच शुरू होने के बाद हड़कंप मच गया है।