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एनटीपीसी हादसा

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मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट
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रोहनिया (रायबरेली)। एनटीपीसी हादसे ने 43 लोगों की जान लेने साथ तमाम लोगों की रोजी-रोटी छीन ली है। परियोजना में काम करने वाले मजदूरों को दो वक्त की रोटी के लाले पड़ गए हैं। अब उनके जेहन में एक तरफ हादसे की दहशत है तो दूसरी तरफ परिवार की जरूरतों को पूरा करने की जिम्मेदारी है। इन मजदूरों को अब परियोजना की सभी को यूनिटों में काम शुरू होने का इंतजार है।
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गौरतलब है कि 1 नवंबर को ऊंचाहार एनटीपीसी की यूनिट नंबर छह में हादसे के बाद 43 लोगों की जान चली गई थी। कई लोग जिंदगी और मौत के बीच अभी भी जूझ रहे हैं। इस दर्दनाक हादसे के बाद यूनिट में काम करने वाले लगभग 1500 मजदूरों को काम पर आने से रोक दिया गया है। इससे उनके सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। दो वक्त की रोटी की दिक्कत होने लगी है। परिवार के खर्चे को पूरा करने के लिए पैसे नहीं हैं। दिहाड़ी मजदूर राकेश कुमार, सुखदेव, जमुना प्रसाद, रामनरेश, बाबूलाल ने बताया कि हम लोग इसी यूनिट में काम करते थे। हादसे के बाद काम बंद होने से परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। रामप्रसाद, भगवानदीन, शिवचरण, हनुमंत ने बताया कि एनटीपीसी ही हम लोगों की रोजी-रोटी का सहारा है। यहीं काम करने के बाद मिलने वाली मजदूरी से ही परिवार की जरूरतें पूरी होती थीं। अब संकट हो रहा है। इसी तरह सरजू, गणेश प्रसाद व पितांबर ने कहा कि हादसे के बाद से अब एनटीपीसी में काम करने से डर लग रहा है, लेकिन दूसरा कोई रास्ता भी नजर नहीं आ रहा है। यूनिट चालू हों तो वहां फिर से मजबूरी में काम करने जाएंगे। काम न मिल पाने से मजदूरी भी नहीं मिल रही है। ऐसे में घर का खर्च चलाने की दिक्कत आ रही है।
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