कुंभ मेले के चलते जिले की 453 नहरों का पानी बंद कर देने से नहरें सूख गईं। इससे लाखों तीन लाख किसान परेशान हैं। किसानों को गेहूं की दूसरी बार सिंचाई करनी है। पानी न मिलने से सिंचाई का संकट खड़ा हो गया हैं। पानी नहीं मिला तो फसल सूख जाएगी।
सिंचाई विभाग के अफसरों ने उच्चाधिकारियों का आदेश बताकर पल्ला झाड़ लिया है। अफसरों की मानें तो 28 जनवरी के बाद ही पानी मिलने की संभावना है। यदि समय रहते फसलों को पानी नहीं मिला तो इसका असर उत्पादन पर पड़ सकता है।
जिले में तीन लाख 85 हजार किसान हैं। इसमें से तीन लाख किसान नहरों और माइनरों के पानी से अपनी फसलोें की सिंचाई करते हैं। किसानों की सिंचाई करने के लिए नहरों का जाल बिछाया गया है। यहां पर 453 नहरें और माइनरें हैं।
इस बार डेढ़ लाख से अधिक हेक्टेअर में गेहूं की फसल की बोआई की गई है। अब दूसरी बार गेहूं की फसल की सिंचाई करनी है। ऐसे में यहां की 453 नहरों का पानी बंद कर दिया गया है। अचानक पानी बंद होने से किसानों में हाहाकार मच गया है।
कुछ किसान तो नलकूप के सहारे फसलों की सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन जो किसान सुविधा सम्पन्न नहीं हैं। उनके सामने सिंचाई का संकट है। इससे वे परेशान हैं। ऐन वक्त पानी बंद किए जाने से किसान खासे खफा हैं। वहीं अफसरों का कहना है कि कुंभ मेले के चलते पानी बंद किया गया है।
बछरावां ब्लॉक क्षेत्र के किसान रमाशंकर, प्रदीप चौधरी, राही ब्लॉक क्षेत्र के अखिल, महराजगंज ब्लॉक क्षेत्र के रामलखन समेत अन्य किसानों का कहना है कि एक समय था जब सिर्फ नहरों के सहारे ही खेती होती थी, लेकिन अफसरों की लापरवाही से अब यह संभव नहीं रह गया है।
महीनों और सालों तक नहरें सूखी पड़ी रहती है। गेहूं की सिंचाई के लिए पानी की बहुत जरूरत हैं, लेकिन नहरों में धूल उड़ रही है। नलकूपों से सिंचाई के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। फसल की लागत भी अधिक आती है। अन्नदाताओं ने कहा कि यदि नहरें न चलीं तो फसल कमजोर हो जाएगी और उत्पादन नहीं होगा।
सिंचार्ई विभाग के एक्सर्ईएन सिद्धार्थ का कहना है कि कुंभ मेले के चलते शनिवार से पानी बंद कर दिया गया है। इस वजह से किसानों कुछ समस्या जरूर आ रही है। हालांकि 28 जनवरी के बाद ही सभी नहरों को फिर से चालू कर दिया जाएगा। किसानों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।