रायबरेली। जिले में भले ही अब तक 44 लोग कोरोना संक्रमित मिले हैं, फिरभी जिला पूरी तरह से महफूज है। अब तक जो भी संक्रमित मिला, उसे 20 से 25 दिन पहले ही कंप्युनिटी से बाहर कर क्वारंटीन में पहुंचा दिया गया।
प्रशासन की सतर्कता का ही नतीजा है कि संक्रमित पाए लोगों को सर्च अभियान चलाकर जमातियों समेत 387 संदिग्ध लोगों को क्वारंटीन में न रखा गया होता तो संक्रमितों की संख्या बहुत जाती और जिले में खतरा तेजी से बढ़ सकता था। जिले के अन्य क्षेत्रों से भरे गए 400 लोगों के सैंपल निगेटिव आ चुके हैं।
मंडलायुक्त और जिले के कोरोना के नोडल अधिकारी मुकेश कुमार मेश्राम का कहना है कि जिले के लिए अच्छी बात है कि अब तक जो भी कोरोना संक्रमित लोग पाए गए हैं, उन लोगों को पहले से ही क्वारंटीन में रखा गया है।
सभी संक्रमित 20 से 25 दिनों से क्वारंटीन में हैं। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। लोग लॉकडाउन का शत प्रतिशत पालन करने के साथ ही सोशल डिस्टेसिंग का पालन करें। अपनी सुरक्षा के बारे में ध्यान दें। प्रशासन कोरोना से लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है। सुरक्षा के सारे बंदोबस्त किए गए हैं। जिले के लोग महफूज हैं।
जिले में अप्रैल में अब तक 44 कोरोना केस मिल चुके हैं। इनमें 37 जमाती बताए जा रहे हैं। चार अप्रैल को जब पहली बार दो कोरोना के मरीज मिले, तभी जमातियों व उनके संपर्क में आने वाले लोगों को चिन्हित करने के साथ ही उन्हें समाज से बाहर करने का काम शुरू किया गया।
शहर के खाली सहाट, किलाबाजार, सलोन, ऊंचाहार, बछरावां आदि स्थानों से 387 लोगों को चिन्हित करके क्वारंटीन में रखा गया। प्रशासन की सतर्कता का ही नतीजा है कि एक-एक बार सभी की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी उन्हें क्वारंटीन से जाने नहीं दिया गया। मंगलवार को संक्रमित पाए गए युवक में 24 दिन बाद कोरोना की पुष्टि हुई।