रायबरेली। विकास के दावों की पोल खोलती एक ऐसी बानगी जो प्रशासन की सुस्ती पर सवालिया निशान लगाती है। जिले के औद्योगिक क्षेत्रों को स्वतंत्र बिजली मुहैया कराने का सपना पिछले 42 सालों से फाइलों में ऐसा उलझा कि इसके लिए जारी 42.22 लाख रुपये का बजट भी हवा हो गया। साल 1984 से 1995 के बीच स्वीकृत हुई इस रकम का आज तक कोई अता-पता नहीं है और जिम्मेदार अधिकारी हर बार की तरह अब भी इस गंभीर लापरवाही से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं।
रायबरेली के औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए यह धनराशि आवंटित की गई थी। वर्ष 1984 से 1995 के बीच 42.22 लाख रुपये बिजली वितरण खंड द्वितीय को दिए गए थे। इन रुपयों से स्वतंत्र बिजली फीडर स्थापित किए जाने थे, लेकिन सात औद्योगिक क्षेत्रों के लिए दिए गए बजट का अता-पता अब तक नहीं है। औद्योगिक क्षेत्रों सलोन, छतोह, जायस, खीरों, ऊंचाहार, लालगंज, खीरों में अब तक स्वतंत्र फीडर से बिजली की आपूर्ति नहीं हो सकी है। इस लापरवाही के कारण जिले में औद्योगिक निवेश प्रभावित हो रहा है।
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सुरेश के प्रयास से सलोन में अब बना प्रस्ताव
सलोन को वर्ष 1984 में ही 3.60 लाख रुपये स्वतंत्र फीडर के लिए दिए गए, लेकिन कोई काम नहीं हुआ। अब लघु उद्योग भारती के प्रदेश सचिव सुरेश गुप्ता के प्रयास पर डीएम सरनीत कौर ब्रोका के आदेश पर पॉवर कॉर्पोरेशन ने स्वतंत्र फीडर की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार हो गया है। दोबारा बजट मिलने के बाद बिजली की लाइन बिछाने का काम शुरू होगा। सुरेश गुप्ता का कहना है कि सलोन औद्योगिक क्षेत्र में अब तक स्वतंत्र फीडर से बिजली नहीं मिल रही है। इसके लिए प्रयास किया जा रहा है।
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स्वतंत्र फीडर के लिए पॉवर कॉर्पोरेशन को मिली धनराशि
औद्योगिक क्षेत्र कब दी धनराशि कुल बजट
सलोन - 31 दिसंबर 1984 - 360000
लालगंज - 31 दिसंबर 1986 - 668000
जायस -31 दिसंबर 1986 -383000
छतोह -18 मार्च 1987 -112000
खीरों -26 जुलाई 1994 -563000
ऊंचाहार - 01 मार्च 1990 -1202478
डलमऊ - 06 दिसंबर 1995 -934000
कुल -4222478
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औद्योगिक क्षेत्रों में स्वतंत्र फीडर स्थापित कराने का मामला काफी पुराना है। इसके लिए कितना बजट मिला। इसकी जानकारी लेनी होगी। बजट मिलने के बाद क्या प्रगति हुई। इसके बाद भी जानकारी ली जाएगी।
अविनाश कुमार, अधीक्षण अभियंता, विद्युत वितरण मंडल द्वितीय रायबरेली
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औद्योगिक क्षेत्रों के विकास की जिम्मेदारी वर्ष 1984 से यूपीसीडा के पास थी। शासन ने अब यह जिम्मेदारी उद्योग केंद्र को दी है। स्वतंत्र फीडर के लिए बिजली विभाग को दिए गए बजट के संबंध में जानकारी मांगी गई है।
परमहंस मौर्या, उपायुक्त उद्योग रायबरेली
नसीराबाद कस्बा स्थित औद्योगिक क्षेत्र