रायबरेली। दवाओं के काले कारोबार में कई साल से जिला सुर्खियों में है। पिछले महीने लखनऊ में पकड़े गए दवा के कारोबार से जुड़े संगठित नेटवर्क में जिले का भी एक कारोबारी शामिल है। पिछले साल यह कारोबारी उन्नाव जिले में जेल जा चुका है। लखनऊ में उसके खिलाफ एफआईआर के बाद बछरावां स्थित मिश्रा मेडिकल एजेंसी में जांच के लिए दो बार टीम आ चुकी है। एजेंसी को जांच के बाद सील किया गया है।
जांच में फर्जी बिल पर लखनऊ से 32 हजार टैबलेट एंटीबायोटिक दवा खरीदने की पुष्टि हुई है। दवाओं की खरीद में फर्जीवाड़े का पता जांच टीम लगा रही है। पिछले महीने लखनऊ में दवा कारोबारियों के खिलाफ एफआईआर हुई थी। इस एफआईआर में जिले के बछरावां के दवा कारोबारी मनीष मिश्रा का नाम भी शामिल है। वह बछरावां में पत्नी के नाम लाइसेंस लेकर दवा का कारोबार करता है।
अमीनाबाद के मिश्रा एसोसिएट्स और रायबरेली के बछरावां स्थित मिश्रा मेडिकल एजेंसी के माध्यम से 32 हजार से अधिक टैबलेट का फर्जी बिलिंग के जरिये खरीद-बिक्री करने की पुष्टि हुई है। कई और दवाओं की खरीद में फर्जी बिल के प्रयोग की आशंका है। गत पांच अगस्त को ड्रग्स इंस्पेक्टरों की टीम ने मिश्रा मेडिकल स्टोर से आठ संदिग्ध दवाओं के नमूने लेने के बाद उसे सील कर दिया था। दवाओं के इस कारोबार में जिले के कई और दवा कारोबारियों के भी शामिल होने की आशंका है। जांच चल रही है।
65 लाख की कफ सिरप खपा चुका अजय फार्मा का संचालक
पिछले साल शहर के अजय फार्मा ने कोडीनयुक्त सिरप की बिक्री का बड़ा फर्जीवाड़ा किया था। अजय फार्मा के संचालक ने फर्जी तरीके से बंद दुकानों के नाम बिल काटकर सिरप की तस्करी बांग्लादेश तक की थी। उसने लखनऊ, उन्नाव, श्रावस्ती सहित कई जिलों में करीब छह लाख सिरप खपाई थी।
इनकी कीमत करीब 65 लाख रुपये थी। उन्नाव में तो बंद दुकान को ही सिरप बेच दी थी। जिले में भी कई दुकानों को फर्जी बिल के सहारे सिरप की आपूर्ति की थी। सबसे ज्यादा साढ़े तीन लाख शीशी लालगंज स्थित मेडिसिन हाउस को दी थी। मामले में फर्म के संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
बछरावां के मिश्रा मेडिकल एजेंसी के संचालक के खिलाफ लखनऊ में एफआईआर के बाद जांच चल रही है। एजेंसी को सील किया गया है। दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए है।
- अरविंद कुमार, ड्रग इंस्पेक्टर